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चीनी रॉ मैटेरियल से बने आर्मी के बुलेटप्रूफ जैकेट-प्रोटेक्टिव गियर पर सवाल; नीति आयोग के सदस्य बोले- इस पर दोबारा विचार करेंगे

भारत के ज्यादातर ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स अभी रक्षा से जुड़े उत्पाद के लिए चीन से आयात किए गए कच्चे माल पर निर्भर हैं, हालांकि अब इसे बदलने पर विचार किया जा रहा है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | June 21, 2020 1:40 PM
Indian Army, Protective gears, Bullet Proof Jacketsभारत अब तक प्रोटेक्टिव गियर्स के उत्पादन के लिए चीनी कच्चे माल पर निर्भर है।

भारत और चीनी सेनाओं के बीच लद्दाख के गलवान में हुई खूनी झड़प के बाद अब एक बार फिर सीमा पर तनाव बढ़ रहा है। हालात की गंभीरता को भांपते हुए रक्षा मंत्रालय ने डिफेंस से जुड़ा सामान बनाने वाली कंपनियों को तत्काल रूप से 2 लाख बुलेटप्रूफ जैकेट्स और प्रोटेक्टिव गियर बनाने का काम सौंप दिया है, ताकि लद्दाख में फॉरवर्ड बेस के साथ लेह तक सैनिकों के पास किसी चीज की कमी न हो। हालांकि, अब इन इक्विपमेंट्स को तैयार करने वाले मैटेरियल की आपूर्ति पर विवाद खड़ा हो गया है।

दरअसल, भारत में ओरिजनल इक्विपमेंट मैन्युफैकचर्स (OEM) फिलहाल डिफेंस के उत्पाद तैयार करने के लिए चीन का कच्चा माल इस्तेमाल करते हैं। इनमें वह कंपनी भी शामिल है, जिसे 2017 में 1 लाख 86 हजार बुलेटप्रूफ जैकेट्स बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला था। यह जैकेट्स तो फिलहाल डिलीवरी स्टेज में हैं। लेकिन जब सरकार की तरफ से कंपनी को ऑर्डर दिया गया था, तब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा था कि सेना के लिए प्रोटेक्टिव जैकेट बनाने के लिए चीन से रॉ मैटेरियल आयात करने पर कोई रोक नहीं है।

हालांकि, अब हालात बदलने के साथ ही सरकार पर चीनी आयात और उत्पादों के इस्तेमाल को बंद करने का दबाव बढ़ा है नीति आोग के सदस्य और डीआरडीओ के पूर्व प्रमुख वीके सारस्वत ने इस सिलसिले में दोबारा विचार करने का भरोसा दिया है।

द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सारस्वत ने कहा, “एक साल पहले हमने चीनी कच्चे माल के आयात को कम करने की कोशिश की। खासकर बुलेटप्रूफ जैकेट जैसे उत्पादों में, क्योंकि चीनी माल क्वालिटी के मामले में काफी संदिग्ध रहा है। हमने उस कंपनी को भी फोन किया, जिसने पास पहले से सेना का कॉन्ट्रैक्ट था और उनसे कहा कि वह आयात किए सभी रॉ मैटेरियल की ठीक से टेस्टिंग सुनिश्चित करें। अब हमें लगता है कि हमें चीन से रक्षा उत्पादों के लिए होने वाले आयात पर फिर से सोचना होगा। हमें टेलिकॉम और प्रोटेक्टिव गियर से जुड़े कूटनीतिक क्षेत्रों में चीन के कच्चे माल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।”

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