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विदेश मंत्री ने गौतम बुद्ध को बताया था भारतीय तो भड़का नेपाल! नरेंद्र मोदी का बयान याद दिला कहा- लुंबिनी में हुआ था जन्म

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान भगवान गौतम बुद्ध को भारतीय कहा था, इस पर नेपाली विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली/काठमांडू | Updated: August 9, 2020 6:52 PM
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर।

भारत और नेपाल के बीच अब सीमा विवाद के बाद भगवान के जन्मस्थानों को लेकर भी विवाद बढ़ते जा रहे हैं। जहां पहले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भगवान राम का जन्मस्थान भारत स्थित अयोध्या में न होकर नेपाल में बताया था, वहीं अब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भगवान बुद्ध को भारतीय बता दिया है। इसे लेकर नेपाल के विदेश मंत्रालय ने रविवार बयान जारी किया। इसमें कहा गया है कि ऐतिहासिक और पुरातन सबूतों से यह साफ स्थापित और साफ है कि गौतम बुद्ध का जन्म लुंबिनी में हुआ था, जो कि नेपाल में है।

नेपाल की तरफ से कहा गया कि लुंबिनी गौतम बुद्ध का जन्मस्थान होने के साथ बौद्ध धर्म का उद्गम स्थल भी है। यह UNESCO की विश्व धरोहर भी है। नेपाली विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान की भी याद दिलाई है, जो उन्होंने नेपाल की संसद को संबोधित करने के दौरान दिया था। इसमें पीएम ने कहा था कि नेपाल वह देश है, जहां शांति के दूत भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था।

क्या कहा था विदेश मंत्री जयशंकर ने?: बता दें कि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सीआईआई के India@75 शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि महात्मा गांधी और भगवान बुद्ध दो ऐसे भारतीय महापुरुष हैं, जिन्हें दुनिया हमेशा याद रखती है। उन्होंने सवाल किया था कि अब तक के सबसे महान भारतीय कौन हैं जिन्हें आप याद रख सकते हैं? मैं कहूंगा कि एक गौतम बुद्ध हैं और दूसरे महात्मा गांधी हैं। इसी बयान पर नेपाल ने आपत्ति जताते हुए आधिकारिक विरोध जाहिर किया है।

पीएम ओली के भगवान राम को नेपाल से बताने पर भी हुआ था विवाद: नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कुछ समय पहले ही दावा किया था कि “वास्तविक” अयोध्या नेपाल में है, भारत में नहीं। उन्होंने कहा कि भगवान राम का जन्म दक्षिणी नेपाल के थोरी में हुआ था। ओली के इस बयान को लेकर भारत में उनकी काफी आलोचना भी हुई थी। तब नेपाली विदेश मंत्रालय को सफाई पेश करनी पड़ी थी। नेपाल की तरफ से कहा गया था कि ओली के इस बयान से किसी की भावना की ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था। बयान का उद्देश्य अयोध्या के महत्व और सांस्कृतिक मूल्य को कम करना नहीं था। श्री राम और उनसे जुड़े स्थानों को लेकर कई तरह के मिथ और संदर्भ हैं। पीएम और अधिक अध्ययन और शोध के महत्व को रेखांकित कर रहे थे।

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