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कोरोना की दवा से पहले भी इन मसलों पर विवादों में घिर चुके हैं बाबा रामदेव, केंद्र-राज्य सरकारों ने भी कई प्रस्तावों पर नहीं दिया साथ

बाबा रामदेव और उनके साथी आचार्य बालकृष्ण सरकार को पहले ही कई योजनाओं के प्रस्ताव दे चुके हैं, हालांकि कई मामलों में उनके प्रस्ताव नकारे गए हैं।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: June 26, 2020 2:29 PM
आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की दवा के प्रचार पर रोक लगा दी है। (फाइल फोटो)

बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद की तरफ से लॉन्च की गई कोरोनिल दवा पर विवाद लगातार जारी है। आयुष मंत्रालय ने कोरोना के इलाज के तौर पर पेश की गई इस दवा के बारे में ज्यादा जानकारी मांगी है। मोदी सरकार ने इसे लेकर पतंजलि पर दबाव भी बनाया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड किसी विवाद से घिरी है या उसका कोई प्रस्ताव रद्द हुआ है। 2014 से ही देश में स्वेदशी उत्पादों का प्रचार करने में जुटी इस कंपनी को पहले भी कुछ मामलों में जांच का सामना करना पड़ा है।

2015 में पतंजलि ने सरकार द्वारा चलाए जा रहे खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन को नए सिरे से शुरू करने का प्रस्ताव रखा था। पतंजलि ने इससे जुड़ी रिसर्च, मार्केटिंग, क्वालिटी कंट्रोल और प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी लेने का प्रस्ताव दिया था। इसके लिए पतंजलि के अधिकारियों ने मध्यम एवं लघु उद्योग मंत्रालय के साथ तीन राउंड की बैठक भी की थी। हालांकि, बाद में MSME मंत्री कलराज मिश्रा ने पतंजलि के प्रस्ताव को यह कह कर नकार दिया था कि खादी की अपनी पहचान है, जिससे छेड़छाड़ नहीं की जा सकती।

2017 में योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद पतंजलि ने बच्चों को स्कूल में मिलने वाली मिड-डे मील योजना के तहत पंजीरी बंटवाने का प्रस्ताव भी दिया था। लेकिन राज्य सरकार ने इसे नहीं माना था।

इससे पहले रामदेव और उनके साथी आचार्य बालकृष्ण ने नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत हरिद्वार के घाटों को अडॉप्ट करने का प्रस्ताव भी दिया था। लेकिन उनके साथ अन्य एनजीओ को घाटों की स्थिति सुधारने के लिए गंगा नदी के पास सिर्फ पौधे लगाने की ही अनुमति दी गई थी। इसके अलावा पतंजलि आयुर्वेद दक्षिण भारत में वेदों से जुड़े तीन चैनल लॉन्च करने की योजना भी पेश कर चुका है। हालांकि, इसे सरकार की ओर से तीन साल तक कमियों की वजह से मंजूरी नहीं मिली। आखिरकार पिछले साल रामदेव को चैनल शुरू करने का लाइसेंस मिला है।

इसके अलावा पतंजलि का नोएडा में फूड पार्क खोलने का एक प्रस्ताव भी पहले क्लियरेंस न मिलने की वजह से अटक चुका है। तब फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री ने कहा था कि पतंजलि ने प्रोजेक्ट से जुड़ी कई जानकारियां अभी तक नहीं दी हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद रामदेव और बालकृष्ण को सरकार की तरफ से सहयोग का आश्वासन दिया था। प्रोजेक्ट को जरूरी दस्तावेज देने के बाद आखिर में क्लियर कर दिया गया था।

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