ताज़ा खबर
 

अवमानना केसः सजा के बाद राजीव धवन ने प्रशांत भूषण को तुरंत दिया 1 रुपये का सिक्का, BJP महिला नेता ने कसा तंज

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक ट्वीट करने के कारण आपराधिक अवमानना के दोषी अधिवक्ता प्रशांत भूषण को सोमवार को सजा सुनाते हुये उन पर एक रुपए का सांकेतिक जुर्माना किया।

Contempt Case में सजा के बाद अपने वकील राजीव धवन से एक रुपए का सिक्का लेते हुए अधिवक्ता और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण। (फोटोः टि्वटर/@pbhushan1)

अवमानना केस में अधिकवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता प्रशांत भूषण को सजा के बाद वकील राजीव धवन ने उन्हें फौरन एक रुपए का सिक्का दिया। भूषण ने अपने टि्वटर अकाउंट से इससे जुड़े (सिक्का लेते हुए) दो फोटो माइक्रो ब्लॉगिंग साइट टि्वटर पर शेयर किए। उन्होंने लिखा, “मेरे वकील और वरिष्ठ सहयोगी राजीव धवन ने अवमानना ​​के फैसले के तुरंत बाद एक रुपए का योगदान दिया, जिसे लेकर मैंने उन्हें आभार व्यक्त किया।”

प्रशांत भूषण के इस ट्वीट पर फैंस, फॉलोअर्स और अन्य लोगों ने भी कमेंट्स किए। इन्हीं में BJP नेता प्रीति गांधी थीं, जिन्होंने तंज कसते हुए लिखा- बड़े बेआबरू हो कर…। तेरी महफ़िल से निकले हम!! वहीं, @advmonikaarora ने कहा, “न्यायालय द्वारा सुनवाई के दौरान एक अधिवक्ता ने हुक्का का आनंद लिया। एक अन्य को अवमानना ​​का दोषी माना गया है। दोनों एक साथ बैठते हैं, कोर्ट के धैर्य और आदेश का मजाक बनाते हैं। शर्मनाक !!”

@anuj7534 नाम के हैंडल से कहा गया, “मैं ऐसे निर्णय के सख्त खिलाफ हूँ। प्रशांत भूषण को कम से कम 3 साल की जेल की सजा होनी चाहिए।” 

@KitanuKiller ने लिखा, यह भी एक माफी मांगने जैसा ही है प्रशांत जी ₹1 या ₹100000 बात एक ही है। 

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के प्रति अपमानजनक ट्वीट करने के कारण आपराधिक अवमानना के दोषी अधिवक्ता प्रशांत भूषण को सोमवार को सजा सुनाते हुये उन पर एक रुपए का सांकेतिक जुर्माना किया।

जस्टिस अरूण मिश्रा, जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की तीन सदस्यीय बेंच ने दोषी अधिवक्ता प्रशांत भूषण को सजा सुनाते हुये कहा कि जुर्माने की एक रुपए की राशि 15 सितंबर तक जमा नहीं करने पर उन्हें तीन महीने की कैद भुगतनी होगी और तीन साल के लिये वकालत करने पर प्रतिबंध रहेगा।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी बाधित नहीं की जा सकती लेकिन दूसरों के अधिकारों का भी सम्मान करने की आवश्यकता है।

न्यायालय ने फैसले में कहा कि न सिर्फ पीठ ने भूषण को अपने कृत्य पर खेद प्रकट करने के लिये कहा बल्कि अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल की भी राय थी कि अवमाननाकर्ता को खेद प्रकट कर देना चाहिए।

पीठ ने यह भी कहा कि भूषण ने न्यायालय में दाखिल किये गये बयानों को रिकार्ड पर आने से पहले ही इन्हें मीडिया को जारी कर दिया।

इससे पहले की सुनवाई के दौरान पीठ ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि भूषण को अगर कोई सजा सुनाई जाती है तो अवमानना के इस मामले में उन्हें दोषी ठहराने के फैसले पर पुनर्विचार की उनकी याचिका पर निर्णय होने तक अमल नहीं किया जायेगा।

Next Stories
1 पूर्व लद्दाख में दादागिरी पर अड़ा चीन, भारत को फिर ‘उकसाया’; दोष मढ़ बोला- PLA ने नही लांघी LAC
2 कांग्रेस की हार पर अंखी दास ने लिखा था- 30 साल के जमीनी काम से भारत को स्टेट सोशलिज्म से मुक्ति मिली, फेसबुक विवाद में वॉल स्ट्रीट जर्नल का नया खुलासा
3 फेफड़ों में संक्रमण के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हालत हुई गंभीर, वेटिंलेटर सपोर्ट जारी
ये पढ़ा क्या?
X