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बंगाल में ढही संवैधानिक व्यवस्था- प्रावधान बताते हुए गवर्नर जगदीप धनखड़ ने ममता सरकार पर बोला हमला

गवर्नर का कहना है कि स्टेट फाइनेंस कमीशन बाध्य है कि वह गवर्नर को संस्तुति करे। ये सारा मसौदा स्टेट असेंबली के सामने रखा जाता है। उनका कहना है कि 2014 के बाद से गवर्नर को एक बार भी संस्तुति नहीं की गई।

बंगाल में ढही संवैधानिक व्यवस्था- प्रावधान बताते हुए गवर्नर जगदीप धनखड़ ने ममता सरकार पर बोला हमला
पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी गवर्नर जगदीप धनखड़ का अभिवादन करतीं। (फोटोः ट्विटर@POLLUPDATE)

पश्चिम बंगाल के गवर्नर जगदीप धनखड़ ने फिर एक बार सीएम ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। स्टेट फाइनेंस कमीशन को आधार बनाकर गवर्नर ने ममता सरकार को टैग करते हुए एक ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने स्टेट फाइनेंस कमीशन पर सरकार से सवाल जवाब किए हैं। उनका कहना है कि चौथे कमीशन का कार्यकाल खत्म हो चुका है पर सरकार फिर भी नया आयोग गठित नहीं कर रही है।

ट्वीट में गवर्नर का कहना है कि स्टेट फाइनेंस कमीशन संविधान के आर्टिकल 243-I और 243-Y के तहत बाध्य है कि वह गवर्नर को संस्तुति करे। ये सारा मसौदा स्टेट असेंबली के सामने रखा जाता है। उनका कहना है कि संवैधानिक ढांचे की किस तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही है कि 2014 के बाद से आयोग की तरफ से गवर्नर को एक बार भी संस्तुति नहीं की गई।

धनखड़ ने संविधान के एक आर्टिकल 243-I को भी पोस्ट किया है। इसके मुताबिक वित्त आयोग एक संवैधानिक निकाय है। इसका गठन संविधान के अनुछेद 280 के तहत किया जाता है। इसका मुख्य दायित्व संघ व राज्यों की वित्तीय स्थितियों का मूल्यांकन करना, उनके बीच करों के बंटवारे की संस्तुति करना व राज्यों के बीच इन करों के वितरण के लिए सिद्धांतो का निर्धारण करना है।

वित्त आयोग की कार्यशैली की विशेषता सरकार के सभी स्तरों पर व्यापक व गहन परामर्श कर सहकारी संघवाद के सिद्धांत को सुदृढ़ करना है। इसकी संस्तुतियां सार्वजनिक व्यय की गुणवत्ता में सुधार लाने और राजकोषीय स्थिरता को बढ़ाने की दिशा में भी सक्षम होती है।

गवर्नर ने अपने ट्वीट में लिखा- स्टेट फाइनेंस कमीशन का कार्यकाल पांच साल का होता है, लेकिन चौथा आयोग समय पूरा होने के बाद भी चलता रहा। उनका कहना है कि आयोग के चेयरमैन व सदस्यों को अपना वेतन व भत्ते सरकार को लौटाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ये जनता का पैसा है लिहाजा इसे हर हाल में रिकवर किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल किया कि पांचवां आयोग गठित क्यों नहीं किया जा रहा है।

गौरतलब है कि ममता और धनखड़ के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। गवर्नर जहां सरकार पर गाहे बगाहे हमला बोलते रहते हैं वहीं ममता ने धनखड़ को भ्रष्टाचारी बता चुकी हैं। जैन हवाला मामला का जिक्र कर ममता ने कहा था कि धनखड़ का नाम मामले की चार्जशीट में आ चुका है। ममता बनर्जी के मुताबिक उन्होंने धनखड़ को हटाने के लिए तीन बार पत्र लिखे। राज्यपाल एक भ्रष्टाचारी हैं। केंद्र सरकार एक भ्रष्टाचारी को राज्यपाल कैसे बना सकती है।

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