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स्वतंत्र समाज का आधार हैं संवैधानिक अधिकार: प्रधान न्यायाधीश

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने कहा है कि संवैधानिक ढांचे के तहत संरक्षित एवं गारंटी से मिले अधिकार किसी लोकतांत्रिक एवं स्वतंत्र समाज का आधार हैं।

Author पुणे (महाराष्ट्र) | Updated: September 9, 2018 8:24 PM
भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) दीपक मिश्रा ने कहा है कि संवैधानिक ढांचे के तहत संरक्षित एवं गारंटी से मिले अधिकार किसी लोकतांत्रिक एवं स्वतंत्र समाज का आधार हैं।
शनिवार को यहां डॉ. पतंगराव कदम स्मृति व्याख्यान को संबोधित करते हुए सीजेआई ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को जीने का अधिकार है तो उसे गरिमा के साथ मरने का भी अधिकार है। न्यायमूर्ति मिश्रा ‘‘अधिकारों के संतुलन’’ पर भारती यूनिर्विसटी के विधि छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे यहां संवैधानिक लोकतंत्र है और इसे अंगीकार करने का एकमात्र मिशन एवं उद्देश्य अपने नागरिकों के अधिकारों एवं स्वतंत्रताओं की रक्षा है, जो समाज के विकास की भावना को मजबूत करती है।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘संवैधानिक ढांचे के तहत संरक्षित एवं गारंटी से मिले अधिकार किसी लोकतांत्रिक एवं स्वतंत्र समाज का आधार हैं। हमें अधिकार है और हमें अपने अधिकार का इस्तेमाल संवैधानिक मानदंडों के भीतर रहकर करना चाहिए। सीजेआई ने कहा कि हितों को न्याय के शासन से मान्यता एवं संरक्षण मिलता है। उन्होंने कहा, ‘‘यदि न्याय का शासन ध्वस्त हो जाता है तो कानून का शासन स्वत: ध्वस्त हो जाता है।

निष्क्रिय इच्छा-मृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) पर शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि इच्छा-मृत्यु एक मुश्किल स्थिति है, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस मुद्दे पर विचार इसलिए किया क्योंकि यदि किसी व्यक्ति को जीने का अधिकार है तो उसे गरिमा के साथ मरने का भी अधिकार है। उन्होंने कहा कि कुछ पश्चिमी देश इच्छा-मृत्यु के मुद्दे से निपटने में आज भी जूझ रहे हैं।

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