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सभी को विश्वास में लेने के बाद लागू करेंगे संविधान: प्रचंड

प्रचंड ने कहा, ‘जाति, भाषा, वर्ग के भेदों के बावजूद नेपाल और उसकी जनता को संगठित करने की जरूरत है’।

Author नई दिल्ली | Published on: September 16, 2016 5:57 AM
नई दिल्ली में गुरुवार (15 सितंबर) को नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड का स्वागत करतीं विदेश मंत्री सुषमा स्वराज। (पीटीआई फोटो)

नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल ने गुरुवार (15 सितंबर) को कहा कि जब तक उनके देश में थरू और मधेसी लोगों को विश्वास में नहीं लिया जाता, तब तक नए संविधान को लागू करने का माहौल नहीं बनाया जा सकता। पिछले तीन अगस्त को दूसरी बार नेपाल के प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए दहल, जिन्हें प्रचंड के नाम से भी जाना जाता है, ने कहा कि नई सरकार का मुख्य ध्यान संविधान लागू करने और जरूरी संशोधनों के लिए रास्ता साफ करने से पहले ‘सही माहौल’ बनाने पर है। उन्होंने कहा, ‘हम पहले ही दो संशोधन कर चुके हैं’। सत्ता संभालने के बाद अपने पहले विदेश दौरे के रूप में भारत की चार दिन की सद्भावना यात्रा पर पहुंचे प्रचंड यहां नेपाल दूतावास में नेपाली मूल के लोगों को संबोधित कर रहे थे।

प्रचंड ने कहा, ‘जाति, भाषा, वर्ग के भेदों के बावजूद नेपाल और उसकी जनता को संगठित करने की जरूरत है’। तराई, पर्वतीय क्षेत्रों और मैदानों में लोगों को एकजुट करने की जरूरत बताते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर ऐसा नहीं होता तो नेपाल की संप्रभुता केवल कहने के लिए रहेगी। उन्होंने कहा, ‘अगर वे एकजुट नहीं होते तो राजनीतिक संकट बढ़ेगा’। प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान नेपाली समुदाय ने यह शिकायत भी की कि उन्होंने राजशाही के खिलाफ मुहिम में अहम भूमिका निभाई थी लेकिन नई लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था आने के बाद से उन्हें भुला दिया गया है। मधेसी दलों ने संविधान में सात प्रांत वाले संघीय प्रारूप के खिलाफ छह महीने तक आंदोलन किया था।

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