पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने रविवार को कहा कि उन्होंने सोच-समझकर पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया था और इसका कारण उचित समय आने तक गोपनीय रहेगा।

कोलकाता हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए बोस ने कहा कि वह अपना वोट डालने के लिए बंगाल आएंगे। केरल के मूल निवासी बोस पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने से ठीक एक सप्ताह पहले ही बंगाल के मतदाता बने थे। बोस ने कहा कि मैंने सोच-समझकर इस्तीफा देने का निर्णय लिया है, जिसके कारण उचित समय आने तक गोपनीय रहेंगे।

उन्होंने कहा कि मैंने दिल्ली में इस्तीफा नहीं दिया। मैंने कोलकाता में इस्तीफा दिया। बोस ने कहा कि हर खेल में एंट्री और बाहर होने का समय होता है। मैंने फैसला किया कि अब मेरे बाहर निकलने का समय है।

बोस की टिप्पणियों ने राजनीतिक हलकों में अटकलों को और हवा दी, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को दावा किया कि उन पर इस्तीफा देने के लिए दबाव डाला गया था। ममता ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी राजभवन से आगामी चुनावों के लिए धन वितरित करना चाहती है। आनंद बोस ऐसा होने देने को तैयार नहीं थे। उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के दौरान लाखों नामों को हटाए जाने के विरोध में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कोलकाता में चल रहे प्रदर्शन में यह कहा।

बनर्जी के उस आरोप का जवाब देते हुए, जिसे भाजपा नेताओं ने पहले “बेबुनियाद” बताया था, बोस ने कहा कि निवर्तमान राज्यपाल के रूप में इस समय इन मुद्दों पर टिप्पणी करना मेरे लिए उचित नहीं है।

अपने पूर्ववर्ती जगदीप धनखड़ की तरह, बोस का कार्यकाल भी टीएमसी और राजभवन के बीच कटु संबंधों से भरा रहा। फिर भी, केरल निवासी बोस ने हाल ही में राज्य में अपना मतदाता पंजीकरण कराया है। बोस ने राज्य के साथ अपने घनिष्ठ जुड़ाव का संकेत देते हुए कहा कि मैं पश्चिम बंगाल का एक गौरवान्वित मतदाता हूं। मेरा नाम मतदाता सूची में है। मैं वापस आकर वोट दूंगा। मेरा वोट व्यर्थ नहीं जाएगा।

पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी के साढ़े तीन साल के कार्यकाल के बाद अचानक पद छोड़ने और तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को बोस के अंतरिम प्रतिस्थापन के रूप में नियुक्त किए जाने से चुनाव वाले राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

शनिवार को बनर्जी ने खुफिया ब्यूरो और केंद्रीय जांच ब्यूरो में सेवा दे चुके भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी रवि को “भाजपा का एक दिखावा करने वाला कार्यकर्ता” बताया। गुरुवार शाम को बनर्जी ने “आश्चर्य” व्यक्त किया और X पर लिखा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बोस के इस्तीफे और रवि की नियुक्ति के बारे में सूचित किया।

उन्होंने लिखा कि बोस पर शाह की ओर से “कुछ राजनीतिक हितों की पूर्ति के लिए” दबाव डाला गया हो सकता था। चूंकि बोस गुरुवार को नई दिल्ली में थे, इसलिए कई लोगों ने अनुमान लगाया कि उन्होंने वहीं अपना इस्तीफा सौंप दिया होगा। हालांकि, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि राज्यपाल ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दिया होगा। भट्टाचार्य ने कहा ने कहा कि मुझे यह जानने का कोई साधन नहीं है कि राज्यपाल ने इस्तीफा क्यों दिया। शायद वह अस्वस्थ हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राज्य में कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन और आदिवासी उत्पीड़न पर व्यक्त की गई चिंता पर टिप्पणी करने के लिए पूछे गए सवाल पर बोस ने प्रतिक्रिया देने से परहेज किया। बोस ने कहा कि राष्ट्रपति बहुत अनुभवी, संतुलित और अत्यंत गरिमामय व्यक्तित्व की धनी हैं। उन्होंने जो कहा, उसके पीछे उनके कुछ कारण जरूर रहे होंगे। लेकिन राष्ट्रपति के कथन पर टिप्पणी करने का मुझे कोई अधिकार नहीं है।

राष्ट्रपति मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर पीएम मोदी के निशाने पर सीएम ममता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 33 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने जनसभा को भी संबोधित किया। जनसभा में पीएम मोदी ने बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रोटोकॉल से संबंधित घटना का भी जिक्र किया। पढ़ें पूरी खबर।