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कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्यों को दिल्ली नहीं छोड़ने का निर्देश

सीडब्ल्यूसी के सभी सदस्यों के बीच नए अध्यक्ष को लेकर अनौपचारिक बातचीत जारी है। सभी नेताओं से उनकी पसंद पूछी जा रही है। पार्टी ने वेणुगोपाल को ही यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे किसी एक नाम पर सहमति बनाने का प्रयास करें।

Author नई दिल्ली | Updated: July 11, 2019 12:32 AM
राहुल गांधी

अजय पांडेय

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के मद्देनजर पार्टी के अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद नए अध्यक्ष को लेकर जारी असमंजस के जल्द खत्म होने के आसार हैं। पार्टी ने अपनी सर्वोच्च नीति निर्धारक इकाई कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्लूसी) के सभी सदस्यों से नए अध्यक्ष को लेकर उनकी राय पूछी है और उनसे बंद लिफाफे में अपने तीन-चार पसंदीदा नेताओं के नाम लिखकर पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल को देने को कहा है। सीडब्लूसी सदस्यों को फिलहाल दिल्ली छोड़कर बाहर नहीं जाने की भी ताकीद की गई है। ऐसे संकेत हैं कि 15 जुलाई को सीडब्लूसी की बैठक हो सकती है जिसमें राहुल के इस्तीफे को स्वीकर कर नए अध्यक्ष की ताजपोशी का रास्ता साफ कर दिया जाएगा।

सूत्रों ने बताया कि सीडब्ल्यूसी के सभी सदस्यों के बीच नए अध्यक्ष को लेकर अनौपचारिक बातचीत जारी है। सभी नेताओं से उनकी पसंद पूछी जा रही है। पार्टी ने वेणुगोपाल को ही यह जिम्मेदारी सौंपी है कि वे किसी एक नाम पर सहमति बनाने का प्रयास करें। अध्यक्ष पद के लिए नौजवान नेताओं में पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, राजस्थान के उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट और मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा तो बुजुर्ग नेताओं में सुशील कुमार शिंदे और मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम चल रहे हैं।

सीडब्लूसी के एक सदस्य ने कहा कि यह सही है कि नए अध्यक्ष को लेकर सभी सदस्यों से अपनी राय और पसंद बताने के लिए कहा गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि वे दिल्ली में ही बने रहें क्योंकि नए अध्यक्ष के चयन को लेकर सीडब्लूसी की बैठक कभी भी हो सकती बाकी पेज 8 पर है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 15 जुलाई को यह ौठक हो सकती है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस-जद (सेकु) गठबंधन सरकार पर छाए संकट के कारण भी सीडब्लूसी में देरी हो रही है। लेकिन इसकी वजह से अध्यक्ष के चुनाव में और विलंब नहीं किया जा सकता।

कांग्रेस के नए अध्यक्ष के चयन में हो रही देरी को लेकर पार्टी सूत्रों ने कहा कि रणनीतिकारों के समक्ष सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि गांधी परिवार ने इस पूरे मामले से खुद को बिल्कुल अलग कर लिया है। राहुल गांधी पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके परिवार का कोई भी सदस्य पार्टी का अध्यक्ष नहीं बनेगा। जाहिर है कि गांधी परिवार अपनी ओर से पार्टी पर कोई अध्यक्ष नहीं थोपना चाहता लेकिन यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी तक वही पहुंच पाएगा जो पार्टी व गांधी परिवार के बीच बेहतर तालमेल बनाकर चलेगा।

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