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2019 आम चुनाव: राज्यों के पार्टी प्रमुखों को बदलेगी कांग्रेस

पार्टी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार समेत तमाम राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को बदलने की तैयारी है।

Author नई दिल्ली | April 30, 2017 2:16 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

दो साल बाद होने वाले आम चुनाव के पहले संगठन की हालत कैसे दुरुस्त की जा सकती है, इसको लेकर कांग्रेस ने मंथन शुरू कर दिया है। ब्लॉक और जिला कमेटियों के साथ सीधे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नेता रू-ब-रू हैं। फोकस में उत्तर प्रदेश है, जहां समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर पार्टी ने राजनीतिक पुनरुद्धार की योजना बनाई थी। इसी के साथ बाकी कांग्रेस में संगठन के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू भी हो चुकी है। अध्यक्ष का चुनाव अक्तूबर में होगा। उससे पहले महासचिव के स्तर पर फेरबदल शुरू हो गया है।
महासचिव मधुसूदन मिस्त्री को संगठन चुनाव कराने के लिए शनिवार को गठित की गई कमेटी का हिस्सा बना दिया गया है। इस नाते तकनीकी तौर पर महासचिव पद से उनकी छुट्टी हो जाएगी। महासचिव के कम से कम चार और पद खाली होने के आसार हैं। इन पदों पर सुशील कुमार शिंदे, जितेंद्र सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया सरीखे नेताओं को महासचिव बनाया जा सकता है। उत्तर प्रदेश की कमेटियों के पदाधिकारियों और विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों की बैठक के जरिए मंथन का सिलसिला शुरू किया गया है। इसके बाद हर राज्य के ब्लॉक और जिला स्तर के नेताओं के साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआइसीसी) की सीधे मंत्रणा की योजना है। पार्टी की योजना है कि संगठन चुनाव की कवायद में राज्यों में टूट-फूट की मरम्मत कर दी जाए। इस कवायद में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार समेत तमाम राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को बदलने की तैयारी है।
हाल ही में अशोक गहलोत को महासचिव बना कर उनको गुजरात का प्रभार सौंपा गया है। चार नए सचिव बना कर उनको गहलोत के साथ जोड़ा गया है। जल्दी ही हरियाणा के प्रभारी महासचिव कमलनाथ को मध्यप्रदेश भेजे जाने की तैयारी है। इससे महासचिव का एक और पद खाली हो जाएगा। ओड़ीशा के प्रभारी महासचिव बीके हरिप्रसाद ने पंचायत चुनावों में हार के बाद इस्तीफा दे दिया था। उनको अगले आदेश तक काम करते रहने को कहा गया है। इसके साथ ही मुंबई नगरपालिका चुनावों को लेकर नाराज चल रहे राजस्थान के प्रभारी महासचिव गुरुदास कामत भी अपने इस्तीफे पर अड़े हुए हैं।

उत्तर प्रदेश के उम्मीदवारों और नेताओं की शनिवार को शुरू हुई दो दिनी बैठक की शुरुआत में ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर के इस्तीफे की मांग उठी है। नए नाम भी उछाले गए हैं। मंथन इस बात के इर्द-गिर्द है कि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ को टक्कर दे सकने लायक नाम होना चाहिए। 15 अप्रैल को पूरे उत्तर प्रदेश में ब्लॉक स्तर की और 16 अप्रैल को जिला स्तर की बैठकों के बाद उनकी रिपोर्ट के साथ प्रदेश के नेता आला कमान के साथ बैठक करने जमा हुए हैं। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस 105 सीटों पर लड़ी थी और महज सात पर जीत सकी। तिलहर से जितिन प्रसाद और पिंडरा से अजय राय जैसे भारी-भरकम उम्मीदवार हार गए।  कांग्रेस महासचिव गुलाम नबी आजाद और राज बब्बर की मौजूदगी में कई नेताओं ने नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए हैं। समन्वय को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पहले चरण में चुनाव लड़ने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक उम्मीदवार ने बब्बर पर सवाल उठाया कि पूरे चुनाव वे कहीं नहीं दिखे। अन्य एक ने कहा कि कांग्रेस का अस्तित्व खत्म हो रहा है। लोगों से संपर्क बढ़ाना होगा। अधिकांश लोगों ने राज बब्बर के सामने ही उनके इस्तीफे की मांग की। गुलाम नबी आजाद ने ‘जनसत्ता’ से कहा, ‘देश भर में कांग्रेस की जमीनी स्तर पर संपर्क कायम करने की योजना पर काम चल रहा है। बैठकें हो रही हैं। सांगठनिक बदलाव भी होने हैं। समय लगेगा, लेकिन सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे।’ उन्होंने कहा कि पंजाब में सत्ता मिली। अन्य राज्यों में वोट बढ़े। उससे साफ है कि कांग्रेस की जमीन पुख्ता हो रही है।

उत्तर प्रदेश प्रमुख राज्यों में से एक है। इस लिहाज से वहां फोकस ज्यादा है। वहां सांगठनिक बदलाव के जरिए राज बब्बर की जगह ऐसा चेहरा आगे करने पर मंथन चल रहा है, जो सभी को स्वीकार्य हो और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को चुनौती दे सके। ऐसे में उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष के तौर पर चार बड़े नामों की चर्चा हो रही है। वाराणसी इलाके से अजय राय की पूर्वांचल में अच्छी पकड़ मानी जाती है। वाराणसी से पूर्व सांसद राजेश कुमार मिश्र का नाम भी चल रहा है। इनके अलावा उत्तर प्रदेश के कद्दावर नेता प्रमोद तिवारी और जितिन प्रसाद पर भी आलाकमान गौर कर रहा है। पूर्वांचल के साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड में भी अच्छी पकड़ रखने के चलते प्रमोद तिवारी को दमदार उम्मीदवार माना जा रहा है। कांग्रेस संगठन चुनाव की प्रक्रिया मई से शुरू हो रही है। अक्तूबर में पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव होना है। उसके बाद राज्यों में अध्यक्षों के नाम तय किए जाएंगे। आलाकमान संभावित नामों पर अभी से गौर कर रहा है। महासचिव डॉ. अजय कुमार के अनुसार, ‘युवा कांग्रेस और छात्र संगठन एनएसयूआइ की तर्ज पर कांग्रेस को पुनर्गठित किया जाएगा। युवा और लोगों के बीच पकड़ रखने वालों को आगे लाया जाएगा।’

 

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