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उत्तर प्रदेश में जमीन तलाशने की छटपटाहट में कांग्रेस

जिस उत्तर प्रदेश ने कभी कांग्रेस को सफलता के शिखर पर पहुंचाया, वहां आज पार्टी अपनी जमीन तलाशने की कोशिश में है। प्रदेश के कांग्रेसियों को जनता से जुड़े मसलों पर आंदोलन करने की एक दशक में कई बार नसीहत दे चुकीं सोनिया व राहुल गांधी की बात कांग्रेसियों को प्रदेश की दो संसदीय सीटें […]
Author March 10, 2015 09:37 am
जिस उत्तर प्रदेश ने कभी कांग्रेस को सफलता के शिखर पर पहुंचाया, वहां आज पार्टी अपनी जमीन तलाशने की कोशिश में है।

जिस उत्तर प्रदेश ने कभी कांग्रेस को सफलता के शिखर पर पहुंचाया, वहां आज पार्टी अपनी जमीन तलाशने की कोशिश में है। प्रदेश के कांग्रेसियों को जनता से जुड़े मसलों पर आंदोलन करने की एक दशक में कई बार नसीहत दे चुकीं सोनिया व राहुल गांधी की बात कांग्रेसियों को प्रदेश की दो संसदीय सीटें हासिल करने के बाद समझ आई है। इसीलिए 12 मार्च को केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदेश भर में कांग्रेस रेल और राष्टÑीय राजमार्गों पर आवागमन रोकने जा रही है। देखना दिलचस्प होगा कि आखिर इस आंदोलन में उत्तर प्रदेश से रिश्ता रखने वाले कितने वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शिरकत करते हैं। साथ ही इससे पार्टी को हासिल क्या होता है?

भितरघात, गुटबाजी, नेताओं की सुस्त चाल और आरामतलबी की आदत ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को करारी शिकस्त देने का तानाबाना तैयार किया था। इससे निपटने की कोशिशें शुरू करने की बात प्रदेश के कांग्रेसी नेता अब कर रहे हैं। यह पहली मर्तबा नहीं है जब प्रदेश में कांग्रेसियों को सड़क पर उतर कर जनता से जुड़ी समस्याओं के लिए आंदोलन करने के निर्देश पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की तरफ से मिले हों।

इसके पूर्व कांग्रेस के 125 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र और ब्लाक स्तर पर वर्ष भर सभाएं अयोजित करने की घोषणा तत्कालीन प्रदेश प्रभारी दिग्विजय सिंह ने की थी। 10 नवंबर 2010 को इलाहाबाद से इस कार्यक्रम की शुरुआत होनी थी। इलाहाबाद को प्रतीक स्वरूप इसलिए चुना गया था कि कांग्रेस की पहली वर्किंग कमेटी की बैठक 10 नवंबर 1910 को इलाहाबाद में स्वराज भवन में हुई थी। 28 दिसंबर 2010 से 28 दिसंबर 2011 तक प्रदेश भर में कांग्रेस का बड़ी रैलियां आयोजित करने का कार्यक्रम था। लेकिन इन रैलियों में पार्टी, कार्यकर्ता और नेताओं दोनों को ही जुटा पाने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाई। जनता के बीच इस एक वर्षीय कार्यक्रम का असर कितना हुआ, इसका अंदाजा उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की दुर्दशा को देखकर लगाया जा सकता है।

अपनी इस मुहिम के कुछ समय के बाद उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं ने तत्कालीन बहुजन समाज पार्टी की सरकार से निपटने के लिए कांशीराम के कभी बेहद करीबी रहे राजबहादुर को प्रदेश के दो करोड़ 25 लाख दलित मतदाताओें को दोबारा कांग्रेस में लाने की जिम्मेदारी सौंपी। इसके लिए प्रदेश भर में नवंबर 2010 से अनुसूचित जाति-जनजाति के सम्मेलन आयोजित किए गए। लेकिन पार्टी के पक्ष में कोई खास असर नहीं हुआ। अपने तमाम आंदोलनों को मूर्त रूप देने के बाद प्रदेश कांग्रेस की समीक्षा बैठकों में पार्टी के नेताओं ने ऐसे आयोजनों के औचित्य पर ही सवाल खड़े करने शुरू कर दिए।

एक बार फिर प्रदेश में कांग्रेस केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के विरोध में जनता का समर्थन बटोरने की छटपटाहट के दौर में है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का संगठनात्मक ढांचा कितना सक्रिय है, इस बात का अंदाजा सिर्फ एक वाकये से लगाया जा सकता है। वर्ष 2004 में जगदंबिका पाल के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान कांग्रेस ने प्रदेश भर में रेल रोको आंदोलन किया था। उसके बाद से ऐसे किसी आंदोलन को करने की आवश्यकता न पार्टी को महसूस हुई और न ही नेताओं को।

फिलहाल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपना खोया जनाधार वापस लाने का सपना देख रही है। इसे साकार करने की सटीक रणनीति बना पाने में बीते एक दशक में पार्टी पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। इस बार केंद्र व राज्य सरकार को घेरने के लिए पार्टी ने रेल रोकने और राज्यमार्गों को बाधित करने का जो रास्ता अख्तियार करने की रूपरेखा तैयार की है, उससे उसे कितना लाभ होगा, यह दो वर्ष बाद प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव परिणाम तय करेंगे। लेकिन रेल और सड़क बाधित करने से जनता के बीच पनपने वाला गुस्सा कांग्रेस के लिए बड़ी दिक्कतें पेश कर सकता है जिसके लिए पार्टी और उसके नेता दोनों ही मानसिक रूप से तैयार नहीं हैं।

 

अंशुमान शुक्ल

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  1. H
    hisam
    Apr 13, 2015 at 11:43 am
    i will request to the people of u.p.keep away from congress ,we are not slave of this so called hi familly always using the voters and workers for there own intrest,for nothing they are holding hig posiation in congress and the wrker from moholla village street has to work for this faty familly. as long as they are holding key posation in congress people has to keep distance ,enfough is enfough.
    (0)(0)
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