Congress on Vande Mataram: कांग्रेस की सर्वोच्च समिति यानी कांग्रेस कार्य समिति ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल दो पैराग्राफ ही गाए जाएंगे। CWC के इस फैसले से पार्टी के कुछ वर्गों में बेचैनी लगातार बढ़ती ही जा रही है। कई नेताओं का कहना है कि इस मुद्दे पर पार्टी को अधिक संवेदनशीलता के साथ सोचना चाहिए थे और विवाद को संभालने के प्रयास करने चाहिए।
वंदे मातरम के इस मुद्दे को लेकर जारी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के कानूनी विभाग के प्रमुख अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को कानून की मौजूदा स्थिति के अनुसार अपनी कानूनी राय दी है और सार्वजनिक और निजी कार्यक्रमों के बीच अंतर स्पष्ट किया है।
केरल में नहीं गाया गया वंदे मातरम
बता दें कि वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस ने प्रस्ताव कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के साथ-साथ झारखंड में स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान वंदे मातरम के पूर्ण गायन के ठीक एक हफ्ते बाद पास किया है। झारखंड में कांग्रेस, जेएमएम के नेतृत्व वाली सरकार में एक प्रमुख सहयोगी है। केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का गायन ही नहीं करवाया था।
CWC के एक अन्य सदस्य ने कहा, “यह एक बेतुका मुद्दा था। पार्टी को इस पर टूट पड़ने के बजाय इसे छोड़ देना चाहिए था।” एक अन्य सदस्य ने कहा, “इससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण मुद्दे चल रहे हैं। छात्रों की आकांक्षाएं, चंदा चोरी, सरकार बैकफुट पर दिख रही है। हमें भाजपा की ताकत वाले मुद्दे को उठाकर उन्हें फायदा नहीं पहुंचाना चाहिए।”
पारित कानून को लेकर चर्चा
एक अन्य CWC सदस्य ने कहा कि संसद में सदन में हंगामे के कारण कांग्रेस ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम विधेयक 2026 का विरोध नहीं किया। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के सांसदों के विरोध के बावजूद लोकसभा ने 30 जुलाई को लगभग 15 मिनट में विधेयक पारित कर दिया। डीएमके एकमात्र विपक्षी दल था जिसने चर्चा में भाग लिया।
कांग्रेस नेता ने कहा, “हमने संसद में विधेयक का विरोध नहीं किया क्योंकि उस समय सदन में अशांत माहौल था और कोलाहल के बीच विधेयक पारित हो गया लेकिन यह भी सच है कि हमने संसद के बाहर भी विधेयक का विरोध नहीं किया, क्योंकि हमने परिसीमन या एफसीआरए संशोधन विधेयक के खिलाफ आवाज उठाई थी। अब हम ये सब बातें कह रहे हैं।”
कांग्रेस नेताओं के क्या हैं तर्क?
बुधवार को कांग्रेस की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था सीडब्ल्यूसी ने 1937 के सीडब्ल्यूसी प्रस्ताव का हवाला देते हुए तर्क दिया कि महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर सहित स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं ने वंदे मातरम के सार्वजनिक पाठ को इसके पहले दो श्लोकों तक सीमित रखने का समर्थन किया था। इस फैसले का बचाव करते हुए सीडब्ल्यूसी सदस्य कन्हैया कुमार ने कहा कि हमें स्पष्ट रुख अपनाना ही था। अन्यथा कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती। हमें स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत की रक्षा करनी है क्योंकि यह हमारी विरासत है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कानून
अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सार्वजनिक और निजी समारोहों में अंतर होता है और संशोधित कानून में वंदे मातरम के विशेष तरीके से गायन के बारे में कोई उल्लेख नहीं है। राज्यसभा सांसद ने कहा, “कानून राष्ट्रीय आधिकारिक समारोहों के बारे में बात करता है। इसमें आपके घर होटल या संस्थान में होने वाले निजी समारोहों के बारे में कुछ नहीं कहा गया है। इसके अलावा कानून राष्ट्रगान गाने में बाधा डालने, गायन को रोकने या ऐसे गायन में लगे किसी भी समूह में अशांति पैदा करने के बारे में है।”
वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, “कांग्रेस अपने आंतरिक दलगत कार्यों की बात कर रही है, न कि सरकारी कार्यों की। बीजेपी जानबूझकर देशभक्ति को छह पैराग्राफ्स की कसौटी में बांधकर कांग्रेस के खिलाफ गलत सूचना फैला रही है। कांग्रेस ही वह पार्टी थी जिसने वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया और उसे राष्ट्रगान के बराबर सम्मान प्रदान किया।”
हालांकि केरल में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान वंदे मातरम न होने को लेकर जब अभिषेक मनु सिंघवी से सवाल किया गया तो उन्होंने इस पर अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें भी अपने हिसाब से फैसला ले सकती हैं।
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भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के उस समानता नियम पर पुनर्विचार कर रही है जिसे चुनौती दी गई है। नरेंद्र मोदी सरकार फिलहाल इस पूरे विवाद से निकलने की कोशिश कर रही है। एक तरफ वह सामान्य वर्ग को भी नाराज नहीं करना चाहती तो दूसरी तरफ उसे एससी, एसटी और ओबीसी का भी ख्याल रखना है, क्योंकि 1989 से पार्टी के प्रमुख मतदाता वर्ग रहे उच्च जातियों में संभावित “दुरुपयोग” को लेकर आक्रोश के संकेत मिल रहे हैं। यह भी पढ़िए…
