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कांग्रेस के चिंतन शिविर से तीन दिनों के मंथन के बाद निकलीं तीन बातें

तीन दिनों तक चले चिंतन शिविर में पार्टी के कई नेताओं, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तर्क दिया कि पार्टी को हिंदू त्योहारों को मनाने, धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने और धार्मिक समूहों के साथ संबंध स्थापित करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

Congress, Sonia Gandhi
धार्मिक हिंदुओं को वापस अपने पाले में कैसे लाया जाए, यह सवाल कांग्रेस के लिए अनसुलझा है(फोटो सोर्स: ट्विटर/@INCIndia)।

राजस्थान के उदयपुर में तीन दिनों तक चले कांग्रेस के चिंतन शिविर से पार्टी कार्यकर्ताओं को भारत जोड़ो का नारा दिया गया है। इस शिविर में हुए मंथन के बाद जो तीन बड़े संदेश बाहर आये हैं उनमें भाजपा के हिंदुत्व का मुकाबला कैसे किया जाये, संगठनात्मक परिवर्तन और दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों तक पहुंच बनाने के मजबूत प्रयास शामिल हैं।

भाजपा के हिंदुत्व से मुकाबला: द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक सवाल यह भी हुआ कि भाजपा की हिंदुत्ववादी की राजनीति से लोहा लेने के लिए कांग्रेस को हिंदू धर्म के साथ कैसे जुड़ना चाहिए। उदाहरण के लिए, कई कांग्रेस नेताओं का सालों से तर्क है कि पार्टी को आर्य समाज के साथ संपर्क स्थापित करना चाहिए। जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रभाव से बाहर है।

दरअसल पार्टी को अल्पसंख्यक समुदायों के साथ खड़े होने के मुद्दे पर सभी ने स्वीकार किया है, लेकिन धार्मिक हिंदुओं को वापस अपने पाले में कैसे लाया जाए, यह सवाल कांग्रेस के लिए अनसुलझा है।

साफ है कि भाजपा का प्रचार तंत्र जिस तरह का है, उससे कांग्रेस की संचार प्रणाली मेल नहीं खाती है। चिंतन शिविर में तय किया गया कि जिन राज्यों में गठबंधन आवश्यक हो, वहां पार्टी अपने दरवाजे खुले रखे। हालांकि राहुल गांधी की राय है कि क्षेत्रीय दल भाजपा से लड़ने में सक्षम नहीं है। क्योंकि उनकी कोई विचारधारा नहीं है।

तीन दिनों तक चले चिंतन शिविर में पार्टी के कई नेताओं, विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तर्क दिया कि पार्टी को हिंदू त्योहारों को मनाने, धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने और धार्मिक समूहों के साथ संबंध स्थापित करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

शिविर में यह भी मुद्दा अहम रहा कि पार्टी को सामाजिक और सांस्कृतिक समूहों, गैर सरकारी संगठनों, ट्रेड यूनियनों, थिंक टैंक और नागरिक समाज समूहों के साथ जुड़ना चाहिए।

संगठनात्मक परिवर्तन: चिंतन शिविर में संगठनात्मक परिवर्तन पर भी विचार रखे गये। सभी संगठनात्मक स्तरों पर युवा नेताओं (50 वर्ष से कम आयु वालों) को नेतृत्व की भूमिकाओं में लाने पर जोर होगा। वहीं माना जा रहा है कि अगस्त में कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गांधी की वापसी का मार्ग साफ हो सकता है। ऐसे में कि कोशिश रहेगी कि कांग्रेस के उच्च स्तरीय पदों पर युवाओं को अधिक जिम्मेदारी दी जाये।

दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों तक पहुंच: चिंतन शिविर में तीसरा मुद्दा दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने की रही। दरअसल पार्टी खुद को मजूबत करने के लिए अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों और अल्पसंख्यकों तक पहुंचना चाहती है। हालांकि संगठन में उनके प्रतिनिधित्व के कोटे पर फैसला नहीं हो सका।

मौजूदा समय में पार्टी के संविधान में कहा गया है कि अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के लिए विभिन्न समितियों में 20 फीसदी से कम सीटें आरक्षित नहीं होंगी। इसे बढ़ाकर 50 फीसदी करने पर जोर था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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