कांग्रेस पार्टी ने विपक्ष के अन्य दलों के साथ मिलकर लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इस प्रस्ताव पर टीएमसी के किसी नेता के साइन नहीं है।

कांग्रेस पार्टी ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस नियम 94C के तहत दिया है। लोकसभा सेक्रेटेरिएट के सूत्रों ने जानकारी दी है कि लोकसभा स्पीकर ने सेक्रेटरी जनरल-लोकसभा को नोटिस की जांच करने और उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, कांग्रेस द्वारा लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ पेश किए गए नो-कॉन्फिडेंस मोशन में कहा गया है, “भारत के संविधान के आर्टिकल 94(c) के नियमों के तहत, ओम बिरला को लोकसभा स्पीकर के पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव का नोटिस इसलिए दिया गया है क्योंकि वह लोकसभा का काम खुलेआम एकतरफा तरीके से कर रहे हैं। कई मौकों पर, विपक्षी पार्टियों के नेताओं को बोलने नहीं दिया गया, जो संसद में उनका बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकार है।”

टीएमसी ने क्यों नहीं किए साइन?

कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं ने आज इंडिया गठबंधन के नेताओं के साथ मीटिंग की थी। इस मीटिंग के बाद टीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी ने जनसत्ता से कहा था कि उनकी तरफ से कांग्रेस को सुझाव दिया गया है कि वो पहले अपनी चार मांगे लिखकर पहले स्पीकर को दे, उस पर चर्चा के लिए तीन दिन का समय दिया जाए, इसके बाद भी अगर उनकी मांगे न मानी जाएं, तब अविश्वास प्रस्ताव लाया जाए। माना जा रहा है कि इसी वजह से टीएमसी ने प्रस्ताव पर साइन नहीं किए हैं।

क्या पहले कभी लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन पेश किया गया है?

इससे पहले साल 1954, 1966 और 1987 में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन पेश किए गए थे। दिसंबर 1954 में गणेश वासुदेव मावलंकर के खिलाप अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसके बाद नवंबर 1966 में हुकम सिंह के खिलाफ और अप्रैल 1987 में बलराम जाखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाए गए लेकिन इनमें से किसी की भी कुर्सी नहीं गई। जानिए लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के लिए क्या है नियम । EXPLAINED