पश्चिम बंगाल में वापसी के लिए कांग्रेस विधानसभा चुनाव में पूरा जोर लगा रही है। कांग्रेस के निशाने पर वो सीटें हैं जो 2006 के चुनाव में कांग्रेस पार्टी के पश्चिम बंगाल में सत्ता में आने का रास्ता बनी थी। अभी कांग्रेस की विधानसभा में स्थिति शून्य है लेकिन जिस हमलावर तरीके से कांग्रेस ने रणनीति को बदला है इसका फायदा पार्टी को मिलता नजर आ रहा है। यही वजह है कि खुद नेता विपक्ष राहुल गांधी जब प्रचार के लिए चुनाव मैदान में उतरे थे, तो उनके सीधे निशाने पर बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस थी।
कैसा था कांग्रेस का प्रदर्शन?
पार्टी की चुनाव लड़ने की मजबूती को उनके तल्ख अंदाज से ही भांपा जा रहा है। इसकी तुलना पार्टी के बीस साल पुराने तरीके से की जा रही है जब पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों का कब्जा हुआ था। इस चुनाव में सीपीएम ने 176 सीट जीतकर अपनी सरकार बनाई थी। यहां सीपीएम के खाते में 37.13 फीसदी वोट आए थे। कांग्रेस का सभी सीट पर लड़ने का लाभ भी पार्टी को मिला था। पार्टी के खाते में 21 सीट आई थी जबकि कांग्रेस का वोट प्रतिशत 26.63 फीसदी था। इस चुनाव में पार्टी ने 262 सीट के लिए उम्मीदवार उतारे थे।
2006 में इन सीटों पर जीती थी कांग्रेस
2006 में जिन विधानसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने अपना कब्जा किया था उन सीटों में सिताई, जलपाईगुड़ी, गोलपोखर, रायगंज, खरबा, अराइडंगा, मालदा टाउन, सूजापुर, फरक्का, लालगोला, नाओड, शांति पुर, बड़े बाजार, गार्डनरीच, बड़े बाजार, सियालदाह, कटवा व झालदा जैसी प्रमुख सीट शामिल थी। इसके बाद से कांग्रेस लगातार गठबंधन में चुनाव लड़ती रही है, जिसमें 2011 में टीएमसी के साथ और 2016 व 2021 में वामपंथी दलों के साथ गठबंधन किया। इसका कांग्रेस पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ और वह पश्चिम बंगाल में 0 सीट तक की स्थिति पर पहुंच गई।
राहुल ने टीएमसी-बीजेपी पर साधा निशाना
हाल में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस उम्मीदवारों के समर्थन में एक के बाद एक बड़ी रैली की। जहां कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगियों पर भी जोरदार चुनावी हमले किए। राहुल गांधी ने साफ कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता तृणमूल और भाजपा दोनों से परेशान है। भाजपा भ्रष्ट है और तृणमूल भी भ्रष्टाचार में पीछे नहीं है। इसीलिए प्रदेश की जनता चुनावों में वोट की चोट से सबक सिखाने को तैयार है। राहुल का कहना था कि पश्चिम बंगाल की जनता टीएमसी के भ्रष्टाचार और भाजपा के झूठे वादों से तंग आ चुकी है, इसलिए वह अब बदलाव के लिए तैयार है।
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पश्चिम बंगाल में चल रहे विधानसभा चुनावों में बीजेपी और टीएमसी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बंगाल की सत्ता तक पहुंचने का रास्ता प्रेसिडेंसी डिवीजन से होकर गुजरता है। पढ़ें पूरी खबर
