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राहुल गांधी के बिना कांग्रेस नेताओं की दो दिनी मीटिंग, 10 राज्यों में महागठबंधन पर महामंथन

कांग्रेस की इंटरनल कमेटी की यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ दिनों पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी को करारा झटका दिया है। मायावती ने जहां छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की विरोधी जनता कांग्रेस छत्तीगढ़ से गठबंधन कर लिया वहां मध्य प्रदेश में अपने 22 उम्मीदवारों का भी एलान कर दिया।

Author September 25, 2018 1:35 PM
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। (फाइल फोटो)

दो राज्यों में मायावती के झटके के बाद कांग्रेस अलायंस कमेटी की पहली बैठक सोमवार (24 सितंबर) को हुई। बैठक की अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने की। इस बैठक में 2019 का लोकसभा और आगामी विधान सभा चुनावों के मुद्देनजर सात राज्यों में महागठबंधन की रूपरेखा पर मंथन किया गया। नई दिल्ली में हुई इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी मौजूद नहीं थे क्योंकि वो अपने संसदीय क्षेत्र के दो दिवसीय दौरे पर हैं। उनकी गैर मौजूदगी में एंटनी के अलावा पार्टी महासचिव गुलाम नबी आजाद, अहमद पटेल, आनंद शर्मा, जयराम रमेश एवं कई राज्यों के प्रभारियों ने आंतरिक विचार-विमर्श किया। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस दौरान राज्यवार चर्चा हुई और राज्यों से आए पार्टी नेताओं ने गठबंधन की संभावनाओं और उसके परिणामों पर चर्चा की। यह बैठक मंगलवार (25 सितंबर) को भी जारी है। जिन राज्यों की राजनैतिक स्थिति और प्रस्तावित गठबंधन पर मंथन हुआ उनमें मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, कर्नाटक, ओडिशा, झारखंड और महाराष्ट्र हैं। सभी राज्यों के लिए अलग-अलग समय निर्धारित किए गए थे जिसमें राज्यों के नेताओं ने प्रजेंटेशन दिया। मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना में विधान सभा चुनाव के मद्देनजर यह बैठक अहम मानी जा रही है। हालांकि, बैठक में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है लेकिन राहुल गांधी के लौटने के बाद इस पर ठोस फैसली के संभावना है।

सोमवार को दिनभर चली बैठक में राज्यों के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों, विधानमंडल दल के नेताओं, पार्टी सचिवों और प्रदेश प्रभारियों ने हिस्सा लिया और तमाम संभावनाओं पर चर्चा की। बैठक में तेलंगाना प3भारी केसी कुंतिया, झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह, छत्तीसगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया, एमपी प्रभारी दीपक बाबरिया भी मौजूद थे। पार्टी के वरिष्ठ नेता मंगलवार (25 सितंबर) को राजस्थान, केरल और तमिलनाडु में संभावित गठबंधन पर चर्चा करेंगे। बता दें कि इस साल के अंत तक यानी दिसंबर में चार राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम) में विधान सभा चुनाव होने हैं। इनके अलावा तेलंगाना में भी दिसंबर तक चुनाव कराए जा सकते हैं क्योंकि वहां के सीएम के चंद्रशेखर राव ने इसी महीने 6 सितंबर को निर्धारित वक्त से करीब सात महीने पहले ही विधानसभा भंग कर दी थी।

पार्टी नेताओं ने बिहार में गठबंधन पर चर्चा के दौरान कहा कि वहां राजद के साथ गठबंधन मजबूत है और उसमें कुछ और छोटे दल शामिल हो सकते हैं। झारकंड में भी कांग्रेस का झारखंड मुक्ति मोर्चा और झारखंड विकास मोर्चा के साथ गठबंधन जारी रहेगा। राजद भी उसका घटक दल है। ओडिशा में पार्टी झामुमो और वाम दलों के साथ गठबंधन करेगी। कर्नाटक के प्रतिनिधियों ने जेडीएस के साथ मौजूदा गठबंधन को जारी रखने और उसे अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया। कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि बसपा सुप्रीमो मायावती 2019 में बीजेपी को रोकने के लिए महागठबंधन जारी रखेंगी।

कांग्रेस की इंटरनल कमेटी की यह बैठक इसलिए भी खास है क्योंकि कुछ दिनों पहले ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी को करारा झटका दिया है। मायावती ने जहां छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की विरोधी जनता कांग्रेस छत्तीगढ़ से गठबंधन कर लिया वहां मध्य प्रदेश में अपने 22 उम्मीदवारों का भी एलान कर दिया। गठबंधन के तहत बसपा छत्तीसगढ़ में 35 सीट पर उम्मीदवार उतारेगी जबकि अजीत जोगी की पार्टी शेष 55 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगी। बसपा कांग्रेस से छत्तीसगढ़ में 15 सीटें मांग रही थी लेकिन कांग्रेस उसे 10 से ज्यादा सीट नहीं दे रही थी। मध्य प्रदेश में भी बसपा 40 से 50 सीटों की मांग कर रही है जबकि कांग्रेस उसे 22 सीटें देना चाह रही है। कांग्रेस का दावा है कि बसपा के साथ अभी भी बातचीत जारी है।

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