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किसान आंदोलन में हिंसा के लिए कांग्रेस जिम्मेदार, केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी को निशाने पर लेकर लगाया आरोप

जावड़ेकर ने कहा कि जिन्होंने भी 26 जनवरी को किसानों को उकसाया उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (फोटो-इंडियन एक्सप्रेस)।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज कहा कि कांग्रेस हताश है, वे चुनाव हार रहे हैं। कम्युनिस्ट उसी स्थिति में हैं, इसलिए वे बंगाल में नई दोस्ती की तलाश कर रहे हैं। वे किसी भी तरह से देश में अशांति फैलाना चाहते हैं। राहुल गांधी न केवल किसानों के विरोध का समर्थन कर रहे थे बल्कि उकसा रहे थे। सीएए के दौरान भी ऐसा ही था, कांग्रेस की रैलियां होती हैं, वे लोगों को सड़कों पर ले जाने के लिए उकसाते हैं और अगले दिन आंदोलन शुरू होता है। यह इस आंदोलन के दौरान भी हुआ। उन्होंने किसानों को उकसाया। किसानों के विरोध में हिंसा की जिम्मेदारी से कांग्रेस बच नहीं सकती है।

जावड़ेकर ने कहा कि जिन्होंने भी 26 जनवरी को किसानों को उकसाया उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कल जिस तरह से लाल किले पर तिरंगे का अपमान हुआ उसे भारत बर्दाश्त नहीं करेगा। राहुल गांधी किसानों का समर्थन नहीं कर रहे थे वे उकसा रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ कृषि क़ानूनों पर कई दौर की वार्ता की। कृषि क़ानूनों से किसान का कौन सा अधिकार कम हुआ है। इन क़ानूनों के द्वारा किसानों को अवसर देने का प्रयास है। कांग्रेस भी समझती है पर सरकार और किसानों के बीच समझौता नहीं होने देना चाहती।

बता दें कि दिल्ली में टैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के एक दिन बाद सरकार ने बुधवार को कहा कि उसने किसानों के साथ बातचीत के दरवाजे बंद होने के बारे में कभी कोई बात नहीं कही, साथ ही इस बात पर जोर दिया कि नये सिरे से बातचीत के बारे में निर्णय होने पर सूचित किया जायेगा ।

केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘ हमने कभी नहीं कहा कि बातचीत के दरवाजे बंद हो गए हैं । क्या आपने कभी सुना कि हमने ऐसा कहा हो । जब भी बातचीत होगी, उसके बारे में आपको जानकारी दी जायेगी। ’’

केंद्रीय मंत्री से पूछा गया था कि क्या किसानों के साथ बातचीत के दरवाजे अब बंद हो गए हैं। गौरतलब है कि पिछले शुक्रवार को 11वें दौर की वार्ता के बाद सरकार ने किसानों से कहा कि वे तीन कृषि कानूनों को एक-डेढ वर्ष के लिये स्थगित करने के प्रस्ताव पर फिर से विचार करें लेकिन किसानों ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। किसानों के साथ अब तक की वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला है ।

बहरहाल, जावडे़कर ने कहा कि किसानों के साथ बातचीत के संबंध में जो भी निर्णय होगा, हम सही समय पर इसकी जानकारी देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ अगर कोई बदलाव हुए हैं तब भी हमने आपको बताया है और हम आपको आगे भी जानकारी देंगे । ’’

यह पूछे जाने पर कि केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में क्या मंगलवार की हिंसा के बारे में भी चर्चा हुई, उन्होंने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल, सुरक्षा समिति से अलग होती है।

यह पूछे जाने पर कि हिंसा को लेकर वे व्यक्तिगत रूप से क्या महसूस करते हैं, उन्होंने कहा, ‘‘ व्यक्तिगत तौर पर मेरी वही भावना है जो आपकी है । ’’

वहीं, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों के सख्त रूख के लिये विदेशी ताकतों को जिम्मेदार ठहराया है और कहा है कि जब आंदोलन की गरिमा समाप्त हो जाए तब कोई समाधान संभव नहीं है ।

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