Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव में एक नाटकीय मोड़ आया है। मंगलवार को कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया गया है। इसे बीजेपी के लिए एक महत्वपूर्ण जीत के तौर पर देखा जा रहा है। मीनाक्षी नटराजन को नेता विपक्ष राहुल गांधी की कोर टीम का सदस्य माना जाता है। उनका नामांकन रद्द होना, कांग्रेस के लिए एक राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के केंद्र में बीजेपी के प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी द्वारा दायर की गई आपत्ति थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्रों के साथ दिए हलफनामे में एक केस की पूरी डिटेल नहीं दी है। केस की डिटेल न देने के चलते ही मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हुआ है।

बीजेपी प्रत्याशी ने भी जताई आपत्ति

बीजेपी प्रत्याशी महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तेलंगाना की एक अदालत में नटराजन के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है और शपथपत्र में इसका उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथपत्र में सभी आपराधिक मामलों का उल्लेख किया जाना जरूरी है लेकिन नटराजन ने जानबूझकर इसे छुपाया।

अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने इसी आधार पर नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया है। राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे न्याय की जीत बताया और कहा कि बीजेपी ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। वकील संकेत गुप्ता ने बताया कि मीनाक्षी नटराजन ने इस आपराधिक मामले में अदालत में अपना जवाब भी दाखिल किया है लेकिन शपथ पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया।

वकील ने कहा, “इस जानकारी को जानबूझकर छिपाया गया है। उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथ पत्र में आपको यह जानकारी देनी होती है।” उन्होंने कहा कि इसी प्रावधान के तहत बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट ने नटराजन की उम्मीदवारी पर आपत्ति दर्ज की थी। भाजपा उम्मीदवार के वकील ने कहा कि नामांकन में और भी बहुत सारी खामियां पाई गई।

कांग्रेस ने क्या कहा?

इस मुद्दे पर कांग्रेस के मध्य प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने दावा किया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है और बीजेपी उन्हें परेशान करने के लिए इस प्रकार के मामले सामने ला रही है। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन को अदालत का एक कारण बताओ नोटिस मिला है और शपथ पत्र में इसका उल्लेख किया जाना जरूरी नहीं है।

हरीश चौधरी ने कहा कि निर्वाचन आयोग के निर्देश साफ हैं कि नामांकन में जानकारी तब देनी होती है, जब मामला दर्ज हो, नोटिस मिलने पर नहीं। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि तकनीकी तौर पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज नहीं किया जा सकता है।

BJP ने पेचीदा किया राज्यसभा का चुनाव

बता दें कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई जिन तीन सीट पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें से दो पर बीजेपी और एक पर कांग्रेस की जीत तय लग रही है। तीसरी सीट के चुनावी गणित के लिहाज से कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या है लेकिन राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी ने तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को पेचीदा बना दिया है। बीजेपी ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट पर मध्यप्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया है।

क्या है पूरा नंबर गेम?

तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल ने शनिवार को नामांकन पत्र दाखिल किया, जबकि मीनाक्षी नटराजन और महेश केवट ने सोमवार को नामांकन दाखिल किया। वर्तमान में मध्य प्रदेश की कुल 230 सदस्यीय विधानसभा में सदस्यों की संख्या 229 है। इनमें बीजेपी के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं जबकि एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है।

दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द हो चुकी है, जिस वजह से एक सीट रिक्त है। श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर उच्च न्यायालय की रोक है। ऐसे में राज्यसभा की तीन सीट पर मतदान होने की स्थिति में प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत होगी।

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