जब नाइट शो में “प्रेम रोग” देख रहे तीन नेताओं को स्क्रीन पर स्लाइड चलवा कर सिनेमा हॉल से बुलवा लिया था ऑस्कर फर्नांडिस ने, राजीव गांधी से करनी पड़ी थी मनुहार

पांडे को याद है कि उन्होंने बाद में गांधी से शिकायत की थी कि उन्हें कम से कम रात में कुछ खाली समय दिया जाना चाहिए।

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नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में ऑस्कर फर्नांडिस। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ऑस्कर फर्नांडिस भले ही अब इस दुनिया में न हों। पर इतिहास के पन्नों में वह अपनी योग्यता, सरलता और किस्सों की वजह से अमिट रहेंगे। ऐसा ही एक किस्सा है साल 1983 का। दिनभर के काम के बाद पार्टी की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के तीन युवा महासचिव तब देर रात दिल्ली में प्रेम रोग फिल्म देखने गए थे। हालांकि, बीच में उन्हें स्क्रीन पर स्लाइड चलवा कर सिनेमा हॉल से बुलवा लिया गया था। और, यह काम ऑस्कर फर्नांडिस ने किया था।

इस तिकड़ी में गणेश शंकर पाण्डे, प्रद्युत गुहा और सुबोध कुमार से स्क्रीन पर आए संदेश के जरिए कहा गया था कि वे थिएटर के मैनेजर से संपर्क साधें। वहां उनके लिए फर्नांडिस का मैसेज था, जो कि तब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के संयुक्त सचिव थे और पार्टी के महासचिव राजीव गांधी से जुड़े थे।

तीनों को उस वक्त कुछ संगठन से जुड़े काम सौंपे गए और फर्नांडीस देर रात तक उनसे जवाब सुनने का इंतजार कर रहे थे। जब उनसे कोई बात नहीं हुई, तो फर्नांडीस यह जानने के लिए एनएसयू (आई) कार्यालय पहुंचे कि तीनों एक फिल्म देखने निकले थे। कांग्रेस हलकों में यह बात भी थी कि फर्नांडीस ने एक सीनियर पुलिस अफसर को फिल्म के बीच में स्लाइड डालने के लिए शहर के कुछ सिनेमाघरों को निर्देशित करने के लिए कहा था।

पांडे या उस मामले के लिए पार्टी के कई वरिष्ठ नेता फर्नांडीस को हर मायने में 24 घंटे सातों दिन सक्रिय रहने वाले नेता के रूप में याद करते हैं। फर्नांडीस जब मनमोहन सिंह की दूसरी सरकार में श्रम मंत्री थे, तब उनके आवास पर आधी रात के बाद भी आने वाले लोगों की लंबी कतार देखना आम बात हुआ करती थी।

पार्टी के नेता उन्हें एक मिलनसार, मृदुभाषी और विनम्र व्यक्तित्व के रूप में याद करते हैं, जो वास्तव में यह मानते थे कि राजनीति “जो नहीं है” के लिए काम करने के बारे में है।

पांडे को याद है कि उन्होंने बाद में गांधी से शिकायत की थी कि उन्हें कम से कम रात में कुछ खाली समय दिया जाना चाहिए। पांडे ने बताया, “मुझे लगता है कि यह ओडियन सिनेमा या प्लाजा था। और फिल्म, अगर मुझे सही से याद है, प्रेम रोग थी। बजरंग लाल तब पुलिस कमिश्नर थे। मुझे लगता है कि फर्नांडिस जी ने कमिश्नर से थिएटर से स्लाइड चलाने के लिए कहने का आग्रह किया। अगले दिन जब हम राजीव जी से मिले…हमने उनसे कहा…राजीवजी हम छोटे लड़के हैं…कम से कम हमें तो रात का आनंद लेने देना चाहिए।”

उन्होंने आगे बताया, “फर्नांडिस जी काम के प्रति इतने प्रतिबद्ध और इतने भावुक थे।” यह ऑस्कर फर्नांडिस की कड़ी मेहनत ही थी, जिसने गांधी को दिसंबर 1984 में उनसे जुड़े संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त करने के लिए प्रेरित किया। यह तब की बात है, जब उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला था। अन्य दो अरुण सिंह और अहमद पटेल थे।

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