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राहुल गांधी का खुलासा- लिट्टे सरगना प्रभाकरण की मौत से मैं और प्र‍ियंका खुश नहीं हुए थे

"1991 में एक आतंकवादी ने मेरे पिता की हत्या करवा दी थी, 2009 में मैंने देखा कि जिस शख्स ने मेरे पिता की हत्या करवाई थी वो श्रीलंका के खेतों में पड़ा हुआ था, मैंने प्रियंका को फोन किया और कहा कि ये बड़ा अजीब है, लेकिन मैं खुश नहीं हूं, मुझे जश्न मनाना चाहिए था कि जो व्यक्ति यहां मरा पड़ा है उसी ने मेरी पिता की हत्या की थी, लेकिन पता नहीं मैं खुश नहीं था।"

जर्मनी के हैम्बर्ग में बकिरस समर स्कूल में संबोधित करते कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फोटो-पीटीआई 22-08-18)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार (22 अगस्त) को कहा कि जब उन्हें आतंकी संगठन लिट्टे के सरगना प्रभाकरण की मौत की खबर मिली तो वे और उनकी बहन प्रियंका खुशी नहीं थे। राहुल जर्मनी के बकिरस समर स्कूल में प्रवासी भारतीय के एक समूह को संबोधित करते हुए कहा, “जब मैंने श्रीलंका में अपने पिता के हत्यारे को मृत पड़ा देखा तो मुझे अच्छा नहीं लगा, मैंने उसके बच्चों में खुद को देखा।” बता दें कि लिट्टे के मुखिया प्रभाकरण ने ही पूर्व प्रधानमंत्री और राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी की हत्या का आदेश दिया था।

1991 में एक आत्मघाती महिला हमलावर ने राजीव गांधी के सामने खुद को उड़ा लिया था, इस घटना में राजीव गांधी मारे गये थे। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने हिंसा में अपने परिवार के दो सदस्यों को खोया है राहुल ने कहा, “मेरी दादी (इंदिरा गांधी) और मेरे पापा (राजीव गांधी) दोनों मारे गये थे, इसलिए मैंने हिंसा की पीड़ा महसूस की है।” राहुल ने आगे कहा, ” मैं अनुभव से बोल रहा हूं, हिंसा के बाद आगे बढ़ने का एक मात्र रास्ता है क्षमा, इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है, और क्षमा के लिए आपको समझना पड़ता है कि असल में हुआ क्या और क्यों हुआ था।” बता दें कि 1984 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की गई थी। इधर लगभग 25 साल तक गृह युद्ध से जूझ रहे श्रीलंका ने 2009 में लिट्टे चीफ बी एस प्रभाकरण को गोली मार दी थी और उसके पूरे अड्डे और नेटवर्क को तहस-नहस कर दिया था।

राहुल गांधी ने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा, “1991 में एक आतंकवादी ने मेरे पिता की हत्या करवा दी थी, 2009 में मैंने देखा कि जिस शख्स ने मेरे पिता की हत्या करवाई थी वो श्रीलंका के खेतों में पड़ा हुआ था, मैंने प्रियंका को फोन किया और कहा कि ये बड़ा अजीब है, लेकिन मैं खुश नहीं हूं, मुझे जश्न मनाना चाहिए था कि जो व्यक्ति यहां मरा पड़ा है उसी ने मेरी पिता की हत्या की थी, लेकिन पता नहीं मैं खुश नहीं था।” राहुल आगे कहते हैं, ” प्रियंका ने कहा तुम ठीक कहते हो मैं भी खुश नहीं हूं।” राहुल ने बताया कि वो खुश नहीं थे क्योंकि मैंने उसके बच्चों में खुद को देखा, इसलिए उसे खेत में पड़ा देखकर मैंने महसूस किया कुछ मेरी तरह बच्चे हैं जो रो रहे हैं।”

राहुल गांधी ने इस दौरान हिंसा और नफरत पर स्पष्टता से अपने विचार रखे। उन्होंने प्रभाकरण का जिक्र करते हुए कहा, “वह एक बुरा या गंदा व्यक्ति था, लेकिन उसके खिलाफ जो हिंसा की जा रही थी उसका असर दूसरों पर पड़ रहा था, जैसे कि इसका असर मुझ पर पड़ा था, यदि आप गहरे जाएंगे तो पाएंगे कि कुछ था जिसने इस हिंसा को जन्म दिया था, यह कोई अकस्मात की घटना नहीं है, कोई एक्शन या हिंसा उसके खिलाफ की गई थी जिससे ये पैदा हुआ था।” राहुल गांधी ने कहा कि हिंसा का मुकाबला सिर्फ एक तरीके से किया जा सकता है और वह है अहिंसा।

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