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आरएसएस पर बरसे राहुल गांधी-मिस्टर मोहन भागवत, क्या आप भगवान हैं?

राहुल गांधी ने कहा,'' आपको लगता है कि आप लोगों पर एक विचारधारा थोपी जा रही है। मैं समझता हूं कि आपको लग रहा है कि आपकी स्वतंत्रता पर हमला किया जा रहा है।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। फोटो- PTI

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को सरकार और आरएसएस की जमकर आलोचना की। राहुल गांधी राजधानी दिल्ली में आयोजित शिक्षाविदों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने एजुकेशन सिस्टम में खामियों पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने सरकार पर शिक्षा व्यवस्था में आरएसएस की विचारधारा थोपने का भी आरोप लगाया।

शिक्षाविदों के साथ बातचीत में राहुल गांधी ने कहा,” आपको लगता है कि आप लोगों पर एक विचारधारा थोपी जा रही है। मैं समझता हूं कि आपको लग रहा है कि आपकी स्वतंत्रता पर हमला किया जा रहा है लेकिन आप अकेले नहीं है जो ऐसा महसूस कर रहे हैं। इस देश के मजदूर, शिक्षक और लगभग सभी ऐसा ही महसूस कर रहे हैं। मैं आपको बताना चाहूंगा कि ये देश ऐसा नहीं है जहां एक ही प्रकार का विचार सभी जगहों पर लागू हो सके।”

एक सवाल का जवाब देते हुए राहुल गांधी ने सर संघचालक मोहन भागवत पर भी टिप्पणी की। राहुल ने कहा कि संघ प्रमुख मोहन भागवत कहते हैं कि राष्ट्र को संगठित करेंगे। मैं पूछता हूं कि आप कौन हैं जो राष्ट्र को संगठित करेंगे। क्या आप भगवान हैं? देश खुद को स्वयं संगठित करेगा। ये आपका खोखला सपना है जो आने वाले दिनों में पूरा हो जाएगा।”

राहुल गांधी ने सरकार पर आरएसएस की घुसपैठ देश की हर संस्था में करवाने का भी आरोप लगाया। राहुल गांधी ने कहा,” मोदी जी जब सत्‍ता में आए थे तो उन्‍होंने एक व्‍यक्ति को एसपीजी को प्रमुख चुना था। कुछ समय बाद उसने मुझसे कहा कि वह यह पद छोड़ रहा है। उसने कहा कि मुझे आरएसएस के लोगों की सूची दी गई है, जिसे भर्ती करना है, मैंने ऐसा करने से मना कर दिया। ये उनका विचार है कि कोई भी ऐसा संस्थान न हो, जिसमें आरएसएस के लोग न हों।”

उन्‍होंने कहा कि हर कोई भारतीय शिक्षा प्रणाली की सफलता के बारे में बात करता है। जब ओबामा ने कहा कि अमेरिका के लिए असली चुनौती भारत से आने वाले इंजीनियर/डॉक्टर/ वकील हैं तो वो यहां की बिल्डिंग की नहीं बल्कि भारत के शिक्षकों की प्रशंसा कर रहे थे। हमारी प्रणाली की नींव सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली है। इसका मतलब यह नहीं है कि निजी संस्थानों के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन पथप्रदर्शक निश्चित तौर पर सार्वजनिक संस्थान होने चाहिए।

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