पंजाब विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने का वक्त बाकी है। इस बीच कांग्रेस आंतरिक गुटबाजी को खत्म करने में जुट गई है। कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी के पंजाब से 66 नेताओं को दिल्ली बुलाया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले चुनावों से पहले राज्य इकाई को फिर से बनाने की ज़रूरत है या नहीं।

यह कवायद ऐसे समय में हो रही है जब पंजाब में विधानसभा चुनाव पहले कराने की बात चल रही है। बीजेपी नेतृत्व ने पहले ही पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गोवा में अपनी राज्य इकाइयों को फरवरी 2027 में होने वाली जनगणना की गिनती के साथ शेड्यूलिंग में टकराव से बचने के लिए विधानसभा चुनाव कम से कम एक महीने पहले कराने की संभावना के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।

अजय माकन की अगुवाई में बना पैनल

कांग्रेस ने AICC के कोषाध्यक्ष अजय माकन की अगुवाई में तीन सदस्यों का एक पैनल बनाया है जो पंजाब में मौजूदा राजनीतिक हालात (जिसमें गुटबाजी और विधानसभा चुनाव शामिल हैं) पर एक रिपोर्ट तैयार करेगा। शनिवार तक एक फाइनल रिपोर्ट जमा होने की उम्मीद है और इससे राज्य कांग्रेस नेतृत्व और चुनाव रणनीति में संभावित बदलावों पर फैसले प्रभावित होने की संभावना है।

सूत्रों ने बताया कि अजय माकन ने मीनाक्षी नटराजन और भजन लाल जाटव के साथ मंगलवार को CWC सदस्य अंबिका सोनी, चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजय इंदर सिंगला, पूर्व राज्य कांग्रेस चीफ राजिंदर कौर भट्टल, शमशेर सिंह ढुल्लो और कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा के अलावा सांसदों और विधायकों समेत 33 नेताओं से मुलाकात की। ये मुलाकात इसलिए हुई ताकि आगे के रास्ते पर उनके विचार सुने जा सकें। पैनल बुधवार को राज्य के पूर्व मंत्रियों और जिला कांग्रेस अध्यक्षों से मिलेगा।

जब पूछा गया कि क्या चर्चा हुई, तो विजय सिंगला ने कहा, “मुझसे उन मुद्दों के बारे में पूछा गया जिन्हें पार्टी को अपने चुनाव कैंपेन में हाईलाइट करना चाहिए। मैंने उन मुद्दों को लिस्ट किया जिन पर कांग्रेस AAP सरकार को एक्सपोज करने के लिए फोकस कर सकती है। मुझसे संगठन के मुद्दों के बारे में नहीं पूछा गया।”

सीएम फेस पर क्या है पार्टी नेताओं की राय?

एक और वरिष्ठ नेता ने कहा कि उन्होंने ऑब्जर्वर से कहा कि चुनाव पहले होने की संभावना है और हाईकमान को जल्द से जल्द नेतृत्व पर फैसला करना होगा। सूत्रों ने कहा कि कुछ नेताओं ने पैनल से कहा कि पार्टी को सीएम फेस के तौर पर एक जट सिख को प्रोजेक्ट करना चाहिए। कांग्रेस में विपक्ष में होने पर सीएम का चेहरा पेश करने की परंपरा नहीं है। जब वह सत्ता में होती है, तो मौजूदा सीएम अपने आप चुनावों में पार्टी को लीड करता है। लेकिन पार्टी ने 2017 में उस परंपरा को तोड़ दिया, जब उसने पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म IPAC के कहने पर अमरिंदर सिंह को चेहरे के तौर पर पेश किया। तब IPAC पार्टी के कैंपेन की कोशिशों की देखरेख करती थी।

2021 में भी बना था पैनल

कांग्रेस ने 2022 के विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी में गुटबाजी और अंदरूनी लड़ाई को सुलझाने के तरीके खोजने के लिए 2021 में भी मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई में तीन सदस्यों का एक पैनल बनाया था, जिसमें पार्टी आखिरकार हार गई थी। जबकि उस समय झगड़ा कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच था, अब गुटबाजी के झगड़े में मुख्य रूप से चन्नी और और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वाडिंग शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि पार्टी का एक वर्ग चाहता है कि हाईकमान अमरिंदर की जगह चन्नी को लाए।

सूत्रों ने कहा कि हाईकमान लीडरशिप में बदलाव पर भी नेताओं की राय मांग रहा था। पिछले महीने के आखिर में दिल्ली में एक मीटिंग में राज्य इकाई के नेताओं के बीच बहस हुई, जिसमें चन्नी ने सीधे तौर पर पूछा कि जब AAP ने अमरिंदर सिंह ल के होम ग्राउंड गिद्दड़बाहा में नगर पंचायत चुनावों में जीत हासिल की है, तो पार्टी विधानसभा चुनावों के लिए कैसे तैयार हो सकती है।

लोकल बॉडी चुनावों में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन ने बजाई खतरे की घंटी

जहां कांग्रेस पंजाब में सत्ता में वापसी की उम्मीद कर रही है, वहीं हाल के लोकल बॉडी चुनावों में उसके खराब प्रदर्शन ने खतरे की घंटी बजा दी है। सूत्रों ने कहा कि अजय माकन कमेटी ने चुनाव से जुड़े पैनल बनाने और जाति और क्षेत्रीय समीकरणों को बैलेंस करने की ज़रूरत पर नेताओं की राय मांगी थी।

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