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एक राजस्थानी यूं दिल्ली दरबार के सामने झुक जाए, 600 सालों में नहीं हुआ- रजत शर्मा को पवन खेड़ा का जवाब

एलएसी पर जारी तनाव को कम करने की कोशिशों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चाइनीज स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी के बीच रविवार को अहम बातचीत हुई, जिसमें दोनों पक्ष एलएसी पर सेनाओं को जल्द पीछे हटाने और शांति कायम करने के लिए सहमत हुए हैं।

Pawan Khera, Congress, Rajat Sharmaपवन खेड़ा ने रजत शर्मा के ट्वीट पर जवाब दिया है। (फाइल फोटो)

भारत और चीन के बीच सीमा पर विवाद का दौर थमता नजर आ रहा है। एलएसी पर जारी तनाव को कम करने की कोशिशों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल और चाइनीज स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी के बीच रविवार को अहम बातचीत हुई, जिसमें दोनों पक्ष एलएसी पर सेनाओं को जल्द पीछे हटाने और शांति कायम करने के लिए सहमत हुए हैं। इस कड़ी में सोशल मीडिया पर लोग प्रतिक्रियाएं जाहिर कर रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने भी सोशल मीडिया पर पीएम मोदी की तारीफ करते हुए एक ट्वीट किया जिसके बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा उनपर भड़क गए और ट्वीट कर उन्हें जवाब दिया। रजत शर्मा ने ट्वीट करते हुए लिखा, ”चीन चाहता था कि गलवान और श्योक के इलाके में भारत सड़क और पुल बनाना बंद करे.लेकिन भारत ने इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम नहीं रोका. लेह और लद्दाख में जो 60 साल में नहीं हुआ मोदी ने कर दिया. इसी से फ़ौज की ताक़त और क्षमता और बढ़ी.”

रजत शर्मा के इस ट्वीट पर पवन खेरा ने लिखा,” बस भी करो पंडित जी। गलवान घाटी को चीन ने 60 सालों में कभी अपना भी नहीं बताया था। चीन की सीमा पर हमारे निहत्थे जवान शहीद हो जाएँ, ऐसा भी 40 सालों में नहीं हुआ था। और एक राजस्थानी, यूँ दिल्ली दरबार के सामने झुक जाए, ऐसा भी 600 सालों में कभी नहीं हुआ”

सोशल मीडिया यूजर्स भी रजत शर्मा के इस ट्वीट पर निशाना साध रहे हैं। @shahidtazak ने लिखा है, ओह रजत शर्मा जी राजस्थानी है ? फिर तो हमारी नाक कटवा दी रजत शर्मा ने। @sameer0449 ने लिखा है,फैक्ट्रियां बंद तो नादियों का पानी साफ न्यूज चैनल बंद हो तो बीजेपी साफ !

गौरतलब है कि एलएसी पर दोनों सेनाओं के पीछे हटने के बाद जहां भारतीय विदेश मंत्रालय ने सधा हुआ और संतुलित बयान दिया है। वहीं चीनी विदेश मंत्रालय ने गलवान घाटी हिंसा पर कुछ कठोर बातें कही हैं। चीनी विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि भारत चीन सीमा के पश्चिमी बॉर्डर पर गलवान घाटी में जो हुआ, उसका सही और गलत पूरी तरह से स्पष्ट है। चीन अपनी सीमा और क्षेत्रीय संप्रभुत्ता की रक्षा के साथ ही सीमा पर शांति की आगे भी कोशिश करता रहेगा। हालांकि चीन की तरफ से अब गलवान घाटी पर अपना दावा पेश नहीं किया गया ।

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