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रिपोर्ट में दावा- कांग्रेस ने किया लोकसभा चुनाव में हार का पोस्टमॉर्टम, सामने आई इस विंग की बड़ी खामी

डेटा प्रोजेक्ट 'शक्ति', जिसे कांग्रेस की मजबूती के लिए तैयार किया गया था। उसी से कांग्रेस पार्टी को सबसे बड़ा धोखा मिला। शक्ति के फेल होने पर पार्टी के सीनियर नेता ने नाम ने बताने की शर्त पर कहा इस प्रोजेक्ट को सुझाव पाने के लिए लॉन्च किया गया था लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया इसी के आधार पर निर्णय लिए जाने लगे।'

Author नई दिल्ली | June 20, 2019 10:27 AM
कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी। फोटो: PTI

कांग्रेस पार्टी को लोकसभा चुनाव में करारी हार का सामन करना पड़ा। कांग्रेस ने चुनाव में अपनी हार का पोस्टमॉर्ट किया है और पार्टी के सामने कई चौंकाने वाली खामियां सामने आई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस के डेटा एनालिटिक्स विभाग द्वारा एकत्रित किया गया डाटा ही पार्टी के लिए मुसीबत बन गया। डेटा प्रोजेक्ट ‘शक्ति’, जिसे कांग्रेस की मजबूती के लिए तैयार किया गया था। उसी से कांग्रेस पार्टी को सबसे बड़ा धोखा मिला।

कांग्रेस के डेटा एनालिटिक्स विभाग ने 2019 के चुनाव अभियान की दिशा और दशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई चाहे वह रॉफेल जेट विमान पर आक्रमक रणनीत हो, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को लुभाने के लिए ‘न्याय योजना’ की रूपरेखा तैयार करना हो या फिर राज्यों में उम्मीदवारों का चयन। विभाग के डाटा के आधार पर ही इन सभी पर निर्णय लिए गए। कांग्रेस की डेटा एनालिटिक्स टीम के प्रमुख प्रवीण चक्रवर्ती  हैं।

पार्टी के अन्य नेता ने कहा ‘डेटा एनालिटिक्स विभाग द्वारा हमें जो जानकारियां दी जा रही थीं उसका उल्टा हुआ। कांग्रेस ने 52 सीटों जीतीं जबकि बीजेपी ने 303 और यह हमारे लिए बेहद चौंकाने वाला रिजल्ट था। हमें बताया गया था कि बीजेपी 2014 का प्रदर्शन दोहरा नहीं पाएगी और कांग्रेस को अच्छे परिणाम हासिल होंगे।’

शक्ति के फेल होने पर पार्टी के सीनियर नेता ने नाम ने बताने की शर्त पर कहा इस प्रोजेक्ट को सुझाव पाने के लिए लॉन्च किया गया था लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया इसी के आधार पर निर्णय लिए जाने लगे।’

बता दें कि कांग्रेस पार्टी की छवि को बेहतर बनाने के लिए राहुल गांधी ने 5 फरवरी 2018 को ट्वीट कर प्रवीण चक्रवर्ती के ‘डाटा एनालिटिक्स’ विभाग के नेतृत्व संभालने की जानकारी दी थी। 46 वर्षीय चक्रवर्ती एक पूर्व निवेश बैंकर और शोधकर्ता हैं जिन्होंने भारत और अमेरिका में कई फर्मों के साथ काम किया है। विभाग की कमान मिलने के बाद उनकी पहली बड़ी परीक्षा 2018 के अंत में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ चुनाव में हुई जिसमें से कांग्रेस ने भाजपा के साथ सीधा मुकाबला कर चुनाव जीता। उन चुनावों से पहले एक साक्षात्कार में चक्रवर्ती ने कहा था कि उनका विभाग बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने के लिए प्रयास कर रहा है।’

क्या है ‘शक्ति’: सटीक डेटा की जरूरत की लिए कांग्रेस ने 2018 में शक्ति प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी। यह डेटा कलेक्शन प्रोजेक्ट था जिसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के वोटर आईडी को एक एसएमएस के जरिए उनके मोबाइल नंबर से जोड़ा गया। जिस तरह बीजेपी ने मिस कॉल के जरिए अपने जनाधार को बढ़ाया ठीक उसी की तर्ज पर ही इसे भी लॉन्च किया गया।

डाटा के विपरीत परिणाम: चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मोदी सरकार की हार की गारंटी ले रहे थे। उन्होंने कई टीवी चैलनों को दिए इंटरव्यू में कहा था कि बीजेपी सरकार को बड़ा झटका लगेगा। ये दावे उन्होंने इन्हीं डाटा के आधार पर किए थे लेकिन परिणाम आने पर इसका उल्टा हुआ। हफपोस्ट की 29 मई की एक रिपोर्ट में कांग्रेस महासचिव द्वारा प्रस्तुत आंतरिक नोट के हवाले से कहा गया था प्रोजेक्ट शक्ति में 75-80% डाटा फर्जी था। सिर्फ 30-35 प्रतिशत ही नॉर्मल कार्यकर्ता थे। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में कांग्रेस सूत्रों के हवाले से कहा गया कि न केवल फर्जी कार्यकर्ताओं द्वारा डाटा से समझौता हुआ बल्कि पार्टी के भीतर विभाग की पूरी कार्यप्रणाली बिना किसी बड़े निरीक्षण के तय की गई थी।

क्यों फेल हुआ प्रोजेक्ट: रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा गया है कि इस प्रोजेक्ट में डाटा एकत्रित करने में कई खामियां थीं। जिनमें से एक जिला स्तर के पदाधिकारियों पर दबाव बनाकर डाटा को एकत्रित करना प्रमुख है। टिकट पाने की चाह में उन्हें लगा कि जितने ज्यादा आवेदन करवा देंगे तो टिकट पाने की संभावनाएं उतनी ज्यादा प्रबल होंगी। यहीं पर गलती हुई। तेलंगाना में तो एक कांग्रेस नेता ने इसके लिए एजेंसी तक को हायर कर लिया था।

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