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नहीं भर पा रहा कांग्रेस का खजाना, शिवसेना-AAP से भी कम चंदा मिला

रिपोर्ट में इस बात का पता चला है कि भाजपा देश की अन्य राजनैतिक पार्टियों के मुकाबले चंदा जुटाने में काफी आगे है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016-17 में भाजपा को 532 करोड़ रुपए का चंदा मिला था।

कांग्रेस की आर्थिक हालत खराब, नहीं मिल पा रहा आवश्यक चंदा। (express photo)

सत्ता से बाहर चल रही कांग्रेस पार्टी की माली हालत भी इन दिनों थोड़ी खस्ता हाल में है। दरअसल पार्टी को मिलने वाले चंदे में भारी कमी आयी है। हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि कांग्रेस को क्षेत्रीय पार्टियों शिवसेना और आम आदमी पार्टी को मिले कुल चंदे से भी कम चंदा मिला है। कॉरपोरेट सेक्टर की तरफ से मिलने वाले चंदे में कमी आने के बाद कांग्रेस अब चंदा जुटाने की पुरानी परंपरा की ओर वापस लौटने का विचार कर रही है। दरअसल कांग्रेस ने इसी हफ्ते हुए एक बैठक में तय किया है कि पार्टी 40 दिनों का एक कार्यक्रम शुरु करने पर विचार कर रही है, जिसमें पार्टी नेता जनता के बीच जाएंगे और पार्टी के लिए चंदा जुटाएंगे। मई, 2018 में छपी ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस ने फंड की कमी के चलते अपने कई पार्टी कार्यालयों को फंड जारी नहीं किया है।

इलेक्शन एंड पॉलिटिकल पार्टी वॉचडॉग “एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने बीते महीने ही एक रिपोर्ट पेश की है, जिसमें साल 2016-17 में क्षेत्रीय पार्टियों को मिले चंदे की जानकारी दी गई है। इस साल की शुरुआत में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने राष्ट्रीय पार्टियों को मिले चंदे की रिपोर्ट जारी की थी। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में इस चंदे की तुलना करने पर यह पता चला कि देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस को क्षेत्रीय पार्टियों शिवसेना और आम आदमी पार्टी के कुल चंदे से भी कम चंदा मिला है। कांग्रेस को जहां साल 2016-17 में 42 करोड़ रुपए का चंदा मिला, वहीं शिवसेना को 26 करोड़ और आम आदमी पार्टी को 25 करोड़ रुपए का चंदा मिला। वहीं रिपोर्ट में इस बात का पता चला है कि भाजपा देश की अन्य राजनैतिक पार्टियों के मुकाबले चंदा जुटाने में काफी आगे है। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2016-17 में भाजपा को 532 करोड़ रुपए का चंदा मिला था।

खास बात ये है कि जिस वक्त कांग्रेस केन्द्र की सत्ता पर काबिज थी, उस वक्त भी भाजपा को कांग्रेस से ज्यादा चंदा मिला था। यूपीए के दूसरे कार्यकाल में भाजपा को मिलने वाला चंदा कांग्रेस को मिलने वाले चंदे का करीब दोगुना था। इसके बाद जब भाजपा की सरकार बनी तो पहले तीन साल में भाजपा को कांग्रेस के मुकाबले 5गुना चंदा ज्यादा मिला। उल्लेखनीय है कि चंदा ही राजनैतिक पार्टियों की आमदनी का एकमात्र स्त्रोत नहीं होता है। इस तरह साल 2016-17 में कांग्रेस को शिवसेना और आम आदमी पार्टी के कुल चंदे के मुकाबले भले ही कम चंदा मिला हो, लेकिन कांग्रेस की कुल कमाई इन दोनों पार्टियों की कुल कमाई से 3.5 गुना ज्यादा रही। इसी तरह समाजवादी पार्टी की आमदनी भी साल 2016-17 में काफी ज्यादा रही, जबकि समाजवादी पार्टी चंदा पाने वाली पार्टियों में चौथे स्थान पर रही थी।

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