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25 दिनों में फुस्स हुई विपक्षी एकता? दिल्ली संकट पर कांग्रेस की चुप्पी पर ममता ने उठाए सवाल!

25 दिन पहले बेंगलुरु में देश की लगभग दर्जन भर से ज्यादा क्षेत्रीय दलों ने मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन किया था। सभी क्षेत्रीय दलों के नेता एक मंच पर थे। उसमें केजरीवाल भी शामिल थे।

Author Updated: June 17, 2018 7:18 PM
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू, केरल के सीएम पी विजयन और कर्नाटक के सीएम एच डी कुमारस्वामी बैठक करते हुए।

पिछले महीने 23 मई को कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में जो विपक्षी महागठबंधन की तस्वीर देश और दुनिया ने देखी थी वो आज दिल्ली के सियासी मोर्चे पर ओझल होती नजर आ रही है। हालांकि, विपक्षी दलों के चार मुख्यमंत्री न सिर्फ खुलकर केजरीवाल के समर्थन में आए हैं बल्कि दिल्ली में जारी गतिरोध को संवैधानिक संकट कहकर उसका जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी से अपील की है। लेकिन इन सबके बीच कांग्रेस की चुप्पी विपक्षी एकता को झकझोरने वाली है। कांग्रेस के लिए संकट यह है कि अगर वो केजरीवाल का समर्थन करती है तो उसे दिल्ली में सियासी नुकसान का अंदेशा है और अगर समर्थन नहीं करती है तो गठबंधन के छिटकने का खतरा है। लिहाजा, कांग्रेस ने इस मसले पर चुप्पी साधना ही बेहतर समझा।

दिल्ली के संकट को संवैधानिक संकट बताने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे पर पत्रकारों से उन्होंने कहा कि दिल्ली के मौजूदा गतिरोध पर कांग्रेस की क्या राय है, इस बारे में आप उन्हीं से पूछिए। पुदुचेरी के सीएम ने इसे सुपर पावर मसला बताया था। इस पर ममता ने सहमति जताई थी लेकिन इसका हल निकालने की भी बात कही थी। बता दें कि ममता बनर्जी के अलावा केरल के सीएम पी विजयन, कर्नाटक के सीएम एचडी कुमारस्वामी और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने कल देर शाम एलजी आवास पर केजरीवाल से मुलाकात की इजाजत चाही थी लेकिन राजनिवास ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद चारों मुख्यमंत्रियों ने केजरीवाल के आवास पर जाकर उनकी पत्नी से मुलाकात की थी। इस दौराम ममता बनर्जी ने कहा था कि एक चुनी हुई सरकार को काम करने देना चाहिए।

कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचा विपक्ष (फोटो सोर्स- पीटीआई)दरअसल, 25 दिन पहले बेंगलुरु में देश की लगभग दर्जन भर से ज्यादा क्षेत्रीय दलों ने मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ एकजुटता का प्रदर्शन किया था। सभी क्षेत्रीय दलों के नेता एक मंच पर थे। उसमें केजरीवाल भी शामिल थे लेकिन एक महीने के अंदर सिर्फ चार क्षेत्रीय दलों के नेता ही केजरीवाल के साथ नजर आ रहे हैं। इससे सियासी जगत में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या विपक्षी एकता दम तोड़ने लगी है?

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