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कृषि कानूनों पर बनी संसदीय समिति से कांग्रेस के 3 MPs ने खुद को कर लिया अलग, 3 में से 1 अधिनियम पर सुझाव बाद उठाया कदम

कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि नियमों को उल्लंघन किया गया और समिति के नियमित अध्यक्ष सुदीप बंदोपाध्याय की गैरमौजूदगी में इस रिपोर्ट को आगे बढ़ा दिया गया।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: March 21, 2021 10:46 AM
कांग्रेस सांसद सप्तागिरी शंकर उल्का और राजमोहन उन्नीथन। (फोटो- Lok Sabha/PRSI)

कांग्रेस के दो सांसदों ने शनिवार को संसद की एक स्थायी समिति की उस रिपोर्ट से खुद को अलग कर लिया, जिसमें केंद्र सरकार से ‘आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम-2020’ को लागू करने की अनुशंसा की गई है। गौरतलब है कि यह अधिनियम भी उन तीनों कानूनों में से एक है, जिनके खिलाफ किसान संगठन पिछले कुछ महीनों से दिल्ली की सीमा के निकट कई स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि नियमों को उल्लंघन किया गया और समिति के नियमित अध्यक्ष सुदीप बंदोपाध्याय की गैरमौजूदगी में इस रिपोर्ट को आगे बढ़ा दिया गया। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बंदोपाध्याय इन दिनों पश्चिम बंगाल चुनाव में व्यस्त हैं। कांग्रेस के तीन सांसदों- सप्तगिरी उल्का, राजमोहन उन्नीथन और वी वैथिलिंगम ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को अलग-अलग पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वह इस मामले में संज्ञान लें और उन्हें लिखित असहमति दर्ज कराने की अनुमति दें।

भाजपा सांसद अजय मिश्रा टेनी की कार्यवाहक अध्यक्षता में खाद्य एवं उपभोक्ता संबंधी स्थायी समिति की रिपोर्ट गत 19 मार्च को लोकसभा के पटल पर रखी गई। उल्का ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा, ‘‘कृपया इस मामले का संज्ञान लें और मुझे इस रिपोर्ट में आधिकारिक रूप से असहमति दर्ज कराने का अवसर प्रदान करें।’’ उल्लेखनीय है कि इस रिपोर्ट में केंद्र सरकार से अनुशंसा की गई है कि ‘आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम-2020’ को ‘अक्षरश:’ लागू किया जाए।

उल्का ने कहा कि 16 दिसंबर 2020 को इस पैनल की मीटिंग में मैंने तीनों कृषि कानूनों पर विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने कहा कि इस मामले पर ड्राफ्ट रिपोर्ट ईमेल के जरिए 17 मार्च 2021 को सर्कुलेट की गई और 18 मार्च 2021 को 10 से 10.30 बजे के बीच स्वीकार कर ली गई। उल्का ने कहा कि इसे संसद के पटल पर उनकी असहमति दर्ज कराए बिना ही रख दिया गया। यह रिपोर्ट जब पास हुई, तो वे बैठक में थे ही नहीं। हालांकि, लोकसभा की वेबसाइट में उल्का का नाम उन सदस्यों में है, जिन्होंने 18 मार्च को मीटिंग में हिस्सा लिया था।

दूसरी तरफ कासरगोड़ से कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने भी लोकसभा अध्यक्ष को इस संबंध में चिट्ठी लिखी। उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि 17 मार्च को जब ड्राफ्ट रिपोर्ट निकाली गई, तब वे मीटिंग में नहीं पहुंचे थे। उन्होंने भी खुद को रिपोर्ट से अलग किए जाने की मांग की है।

बता दें कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस लगातार सरकार से कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते रहे हैं। ऐसे में एक टीएमसी नेता की अध्यक्षता वाली समिति से तीन में से एक कानून लागू किए जाने की सिफारिश पर विपक्षी नेतृत्व ने सवाल उठाए थे। हालांकि, कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह रिपोर्ट गलतबयानी है। दूसरी तरफ टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने इसे धोखेबाजी करार दिया।

विपक्ष ने आरोप लगाया है कि संसद की खाद्य, उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मामलों की स्थायी समिति ने इसके अध्यक्ष सुदीप बंदोपाध्याय (टीएमसी सांसद) की गैरमौजूदगी में ही रिपोर्ट को पास करने का फैसला कर लिया। इस दौरान भाजपा सांसद अजय मिश्र टेनी ने कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी संभाली थी। उनका कहना है कि इस रिपोर्ट को सभी सदस्यों की संस्तुति के बाद ही मंजूरी दी गई।

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