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..तब 20 विधायकों वाली पार्टी के उम्मीदवार थे राजीव शुक्ला पर 51 वोट बटोर पहुंचे थे पहली बार राज्यसभा

राजीव शुक्ला का नाम महाराष्ट्र में एक जमीन विवाद से भी जुड़ चुका है। उस वक्त शुक्ला केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में संसदीय कार्यमंत्री थे।

राजीव शुक्ला न सिर्फ राजनीति में हैं बल्कि वो क्रिकेट, बिजनेस, पत्रकारिता और शिक्षा में समान रूप से सक्रिय हैं। (एक्सप्रेस फोटो)

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला का कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है। कांग्रेस की तरफ से नाटकीय अंदाज में उन्हें गुजरात से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया तो गया मगर वो असल में उम्मीदवार बन नहीं सके और जिनकी जगह उन्हें उम्मीदवार बनाया जा रहा था यानी नारमभाई राठावा ने आखिरकार अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया। कागजात में कमी का अंदेशा भांप पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अंतिम क्षण में राजीव शुक्ला को नामांकन करने को कहा था, पर शुक्ला भी गांधीनगर पहुंचने में देर कर दी। ये अलग बात है कि इसके लिए उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल की भी मदद ली। बता दें कि 58 साल के शुक्ला पिछले अठारह साल से संसद के सदस्य हैं। साल 2000 में पहली बार वो राज्य सभा के सदस्य चुने गए थे।

राजीव शुक्ला ने अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस पार्टी से राजनीति में कदम रखा। उन्होंने साल 2000 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की और पहली बार विधायक बने। इसके बाद 2003 में इनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दिया गया। 2000 में ही महाराष्ट्र से राज्यसभा चुनाव में राजीव शुक्ला उम्मीदवार बनाए गए थे। उनकी पार्टी के पास 20 विधायक थे और सात निर्दलीय विधायकों ने समर्थन का एलान किया था। 11 सीट के लिए कुल 15 उम्मीदवार मैदान में थे, तब राजनीतिक पंडितों ने कहा था कि शुक्ला सबसे आखिरी पायदान पर होंगे लेकिन जब वोटिंग हुई तो शुक्ला को कुल 51 वोट मिले थे। राजीव शुक्ला ने बीजेपी विधायकों से जमकर क्रॉस वोटिंग करवाई थी। छोटी-छोटी पार्टियों के विधायकों से भी शुक्ला की दोस्ती थी, जिसका उन्हें फायदा मिला था।

राजीव शुक्ला न सिर्फ राजनीति में हैं बल्कि वो क्रिकेट, बिजनेस, पत्रकारिता और शिक्षा में समान रूप से सक्रिय हैं। उनकी पत्नी अनुराधा प्रसाद न्यूज 24, ई-24 दो चैनलों के अलावा कई रेडियो स्टेशन बीएजी मीडिया के तहत संचालित करती हैं। शुक्ला की कंपनियों में बॉलीवुड और उद्योग घरानों की कई हस्तियों ने निवेश किया है। शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी खान के अलावा रिलायंस ग्रुप का भी शुक्ला परिवार से जुड़ी कंपनियों में स्टेक है। बीएजी नेटवर्क द्वारा संचालित मीडिया स्कूल ISOMES के एडवायजरी बोर्ड में नीता अंबानी का भी नाम है।

राजीव शुक्ला का नाम महाराष्ट्र में एक जमीन विवाद से भी जुड़ चुका है। उस वक्त शुक्ला केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में संसदीय कार्यमंत्री थे। महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें स्कूल खोलने के लिए करोड़ों की जमीन मुंबई के पॉश इलाके जुहू में बहुत ही सस्ती दर पर दिया था। विवाद बढ़ता देख राजीव शुक्ला ने जमीन राज्य सरकार को वापस कर दी थी। आरोप लगा था कि शुक्ला की बीएजी फिल्म एजुकेशन सोसायटी का रजिस्ट्रेशन अक्टूबर 2006 में हुआ था जबकि जुलाई 2007 में उसे विलासराव देशमुख सरकार ने जमीन आवंटित कर दी थी।

उत्तर प्रदेश के कानपुर के मूल निवासी राजीव शुक्ला मूलत: पत्रकार रहे हैं। उन्होंने हिंदी के बड़े अखबार जनसत्ता में बतौर संवाददाता 1985 तक नौकरी की। इसके बाद उन्होंने पत्रिका, दैनिक जागरण, रविवार और संडे पत्रिका में भी अपनी सेवाएं दी हैं। शुक्ला 1985 से 1988 तक रविवार के विशेष संवाददाता रहे हैं। 1985 से 1992 तक पत्रिका में राजनीतिक संपादक, 1992 से 1995 तक संडे ऑब्जर्वर में एग्जक्यूटिव एडिटर और 1995 से 2000 तक संडे ऑब्जर्वर में सीनियर एडिटर की भूमिका में रहे हैं। इस दौरान उन्होंने राजनीति जगत में अपनी विशेष पैठ बना ली। इसी दौरान शुक्ला ने टीवी शो रू-बरू की भी शुरुआत की। जीटीवी के इस खास इंटरव्यू शो में उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय हस्तियों का इंटरव्यू लिया।

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