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कपिल सिब्बल ने CJI के खिलाफ महाभियोग की याचिका ली वापस, बोले- अगली बार 60 MP का साइन लाऊंगा

कपिल सिब्बल ने कोर्ट से उस ऑर्डर की कॉपी मांगी जिसके आधार पर इस मामले में संविधान पीठ का गठन किया गया था और उन जजों को इस पीठ से दूर रखा गया था जिन्होंने इस साल 12 जनवरी को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ बगावत की थी.

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग का नोटिस खारिज करने के फैसले को चुनौती देनेवाली याचिका आज (08 मई) सुप्रीम कोर्ट से वापस ले ली है। कांग्रेस के दो राज्य सभा सांसदों प्रताप सिंह बाजवा और अमी हर्षाद्रय याज्ञनिक ने राज्यसभा के सभापति और उप राष्ट्रपति वेंकैया नायडू द्वारा सीजेआई दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग नोटिस को खारिज करने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। कांग्रेस सांसदों की याचिका पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने पांच जजों की संविधान पीठ का गठन किया था। इस संविधान पीठ में जस्टिस ए के सिकरी, एस ए बोबडे, एन वी रमन्ना, अरुण कुमार मिश्रा और आदर्श कुमार गोयल शामिल थे।

कपिल सिब्बल कांग्रेस सांसदों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। सिब्बल की पेशी पर भी सवाल उठाए गए। सुप्रीम कोर्ट के दो वकीलों आर पी लूथरा और अश्विनी उपाध्याय ने कपिल सिब्बल की पेशी पर सवाल उठाए और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रावधानों का हवाला दिया और कहा कि अगर कोई एडवोकेट पॉलिटिशियन सीजेआई के खिलाफ लाए जा रहे महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करता है तो उसे उससे जुड़ी किसी भी याचिका पर बहस करने का कोई अधिकार नहीं है। लेकिन संविधान पीठ ने कहा कि यह सिब्बल पर निर्भर करता है कि वो इस मामले की पैरवी करेंगे या नहीं?

इससे पहले कपिल सिब्बल ने कोर्ट से उस ऑर्डर की कॉपी मांगी जिसके आधार पर इस मामले में संविधान पीठ का गठन किया गया था और उन जजों को इस पीठ से दूर रखा गया था जिन्होंने इस साल 12 जनवरी को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ बगावत की थी और प्रेस कॉन्फ्रेन्स किया था। बता दें कि आनन-फानन में सीजेआई ने इस संविधान पीठ का गठन तो किया लेकिन सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों जस्टिस जस्ती चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, एम बी लोकुर, कुरियन जोसेफ को इसमें शामिल नहीं किया। जब कोर्ट ने सिब्बल को ऑर्डर की कॉपी देने से इनकार कर दिया तो उन्होंने यह याचिका वापस ले ली और कहा कि वो मामले की पैरवी तभी करेंगे, जब उन्हें कोर्ट ऑर्डर मिलेगा। याचिका वापस लेते ही कोर्ट ने याचिका निरस्त कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान सिब्बल से बार-बार पूछा कि संविधान पीठ बनाने संबंधी कोर्ट के रोस्टर ऑर्डर का वो क्या करेंगे? इस पर सिब्बल ने कहा कि वो ऑर्डर मिलने के बाद ही तय करेंगे कि वो इसे स्वीकार करेंगे या नहीं। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की तो सिब्बल ने कहा कि वो याचिका वापस ले रहे हैं। सरकार की तरफ से पेश एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने सवाल खड़े किए कि जब राज्यसभा में सात दलों के 64 सांसदों ने महाभियोग नोटिस पर दस्तखत किए थे तब सिर्फ एक पार्टी के दो सांसद की शिकायत पर राज्यसभा के सभापति के आदेश के खिलाफ याचिका कैसे स्वीकार की जा सकती है। इस पर सिब्बल ने कहा कि बहुत जल्द अगली बार वो 60 सांसदों का दस्तखत लेकर आएंगे।

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