PM Modi National Address Controversy: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के मुद्दे पर कांग्रेस आक्रामक हो गई है और पार्टी ने पीएम मोदी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। कांग्रेस ने कहा कि पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन के जरिए निर्वाचित सांसदों की “स्वतंत्रता और निष्ठा” पर सवाल उठाए हैं।
दरअसल, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को प्रधानमंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार कार्यवाही के लिए भेजे गए नोटिस भेजा है। इसमें कहा गया कि भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय टेलीविजन पर राष्ट्र को संबोधित किया, क्योंकि 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 को हार का सामना करना पड़ा था, जो संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रावधानों के तहत आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा था।
केसी वेणुगोपाल ने लगाए आरोप
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राष्ट्र के नाम संबोधन कहे जाने वाले 29 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने विधेयक को रोकने के लिए विपक्षी दलों की आलोचना की और विपक्ष के सदस्यों के मतदान पैटर्न पर सीधे तौर पर टिप्पणी करते हुए उन्हें इसके पीछे के मकसद से प्रेरित बताया।
पीएम मोदी ने दिया था कन्या भ्रूण हत्या का उदाहरण
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के लोकसभा में विफल होने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार रात राष्ट्र को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला और इसके लिए उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या का उदाहरण दिया। उन्होंने विधेयक और इससे संबंधित दो अन्य विधेयकों को पारित होने से रोकने के लिए विपक्ष पर ‘भ्रूण हत्या’ का प्रयोग किया। ये विधेयक सदन में मतों के विभाजन के बाद मुख्य विधेयक के पराजित होने के साथ ही निरस्त हो गए।
पीएम मोदी ने की संसद की अवमानना – केसी वेणुगोपाल
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री का संसद में आवश्यक बहुमत हासिल न कर पाने और संसद का इस्तेमाल विपक्षी दलों की आलोचना करने के लिए करना अभूतपूर्व है, जो अनैतिक और सत्ता का घोर दुरुपयोग है। वेणुगोपाल ने कहा, “देश के सर्वोच्च कार्यकारी पदाधिकारी द्वारा इस तरह के बयान विशेषाधिकार का गंभीर उल्लंघन और सदन की अवमानना है।”
पीएम मोदी पर लगाए गंभीर आरोप
केरल से आने वाले लोकसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह सर्वविदित है कि संसद में सांसदों द्वारा दिए गए भाषणों के संबंध में उन पर आरोप लगाना, लांछन लगाना और उनके इरादों पर सवाल उठाना विशेषाधिकार का घोर उल्लंघन और सदन की अवमानना के बराबर है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह बेहद निंदनीय है कि प्रधानमंत्री, जो इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराना चाहते थे, इतने नाराज हो गए कि उन्होंने राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन सांसदों पर आरोप लगाए जो ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे थे, इस मामले में संविधान की रक्षा कर रहे थे।
संसदीय परंपरा का उल्लंघन – कांग्रेस
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि यह एक समय से चली आ रही संसदीय परंपरा और प्रत्येक सदस्य का एक मौलिक विशेषाधिकार है कि प्रधानमंत्री सहित कोई भी व्यक्ति सदन में किसी भी सदस्य के आचरण या मतदान पर टिप्पणी नहीं करेगा या ऐसे आचरण के पीछे कोई उद्देश्य नहीं बताएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई भी टिप्पणी या आरोप सदन की गरिमा और अधिकार को सीधे तौर पर कमजोर करता है और इसके सदस्यों द्वारा संसदीय कर्तव्यों के स्वतंत्र और निष्पक्ष निर्वहन में बाधा डालता है।
पीएम मोदी विपक्ष पर लगाए थे आरोप
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल के अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा था कि जब कुछ लोगों के लिए दल हित सबकुछ हो जाता है, दल हित देश हित से बड़ा हो जाता है। तो नारी शक्ति को ही इसका खामियाजा उठाना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है। कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी।
महिला आरक्षण: कांग्रेस-सपा, TMC और DMK पर निशाना, पीएम मोदी ने झटके के बावजूद किया ‘प्रॉमिस’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राष्ट्र के नाम संबोधन दिया। इसमें उन्होंने शुक्रवार को लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान के 131वें संशोधन के पारित न होने के मुद्दे पर जनता को संदेश दिया और कहा कि विपक्षी दलों ने इस महिलाओं के आरक्षण से संबंधित इस विधेयक को पारित करने में रोड़ा लगाया। पीएम मोदी ने सीधे तौर पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और टीएमसी को जिम्मेदार ठहराया। पढ़िए पूरी खबर…
