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सपा में झगड़े पर दिल्ली के कांग्रेस नेता की राय से अलग है लखनऊ में कांग्रेसी विधायकों का नजरिया, चाहते हैं अखिलेश यादव से गठजोड़

कांग्रेस के अधिकतर विधायकों का कहना है कि सीएम अखिलेश यादव काफी पॉपुलर हैं, उनकी छवि साफ है।

Author January 3, 2017 2:52 PM
अखिलेश यादव।

समाजवादी पार्टी में चल रही उथल-पुथल को जहां दिल्ली के कांग्रेस नेताओं ने एक ड्रामा सीरियल बताया और यूपी चुनाव के मद्देनजर अखिलेश यादव से गठबंधन की संभावनाओं को नकार दिया है, वहीं यूपी में कांग्रेस के अधिकतर विधायक सीएम अखिलेश के साथ गठबंधन के समर्थन में दिखाई दिए। कांग्रेस के अधिकतर विधायकों का कहना है कि अखिलेश यादव काफी पॉपुलर हैं, उनकी छवि साफ है और सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए धर्म निरपेक्ष पार्टियों को एक साथ आने की जरूरत है। हमारे सहयोगी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस ने कांग्रेस के कई विधायकों से इस संबंध में बात की।

कौशल किशोर सिंह मुन्ना ( नौतनवा): अखिलेश यादव और कांग्रेस दोनों का ही लक्ष्य एक ही है। क्या आपने बटवारा फिल्म देखी है? विनोद खन्ना और धर्मेंद्र हीरो थे। जब वो एक साथ आए तभी दुश्मनों को हरा पाए थे।

विवेक कुमार सिंह (बांदा): अगर अखिलेश, कांग्रेस और रालोद एक साथ चुनाव लड़ते हैं तो देखना बीजेपी की हार निश्चित है। कांग्रेस के पास 10-11 फीसदी वोट हैं। समाजवादी पार्टी का मतलब अब अखिलेश यादव हैं।

गजराज सिंह (हापुड़): मुझे लगता है अगर सभी धर्म निरपेक्ष ताकत एक साथ आए तभी देश को बचाया जा सकता है। मेरा मानना है कि अखिलेश यादव के साथ गठबंधन होना चाहिए।

ललितेश पति त्रिपाठी (मरिहन): अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो यह सबसे अच्छा रहेगा। लेकिन दूसरा विकल्प अखिलेश भी हैं, क्योंकि वह विधायकों की सुनते हैं और उन्होंने अपने क्षेत्र में काम भी किया है।

अजय कपूर (किदवई नगर): कांग्रेस पार्टी को शत-प्रतिशत गठबंधन करना चाहिए, क्योंकि अखिलेश यादव यूपी का सबसे बड़ा चेहरा हैं और वही सरकार बनाएंगे। उनकी छवि साफ है।

राधे श्याम कन्नौजिया (जगदीशपुर): मेरा निजी विचार है कि गठबंधन करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। कांग्रेस को अखिलेश यादव के साथ जुड़ना चाहिए। हमें 2019 को भी ध्यान में रखना चाहिए।

उमाकांति सिंह ( कालपी ) : गठबंधन होना चाहिए… यह दोनों पार्टियों के लिए फायदेमंद होगा… सांप्रदायिक पार्टियों से लड़ने के लिए। बिहार में भी यह सफल रहा था और यहां भी रहेगा।

पंकज कुमार मलिक (शामली): सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए धर्म निरपेक्ष पार्टियों को एक साथ आने की जरूरत है। बिहार में भी ऐसा ही हुआ था।

अजय राय (पिंडरा): कांग्रेस को अकेले चुनाव लड़ना चाहिए। क्योंकि इस समय पार्टी को अपनी ताकत दिखानी चाहिए। यह (सपा में पड़ी फूट) कांग्रेस के लिए फायदेमंद होगी क्योंकि सपा के वोट टूटेंगे और कांग्रेस की झोली में गिरेंगे। खासकर अल्पसंख्यक वोट।

आराधना मिश्रा (रामपुर खास): कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने पहले ही साफ कर दिया कि हम किसी के साथ भी गठबंधन नहीं करने वाले। यह फैसला हमारे वरिष्ठ नेताओं ने लिया है।

अखिलेश प्रताप सिंह (रुद्रपुर): मुझे नहीं पता। पदाधिकारियों को इसकी जानकारी होगी। मेरा कोई विचार नहीं है। मुझे सिर्फ अपना पता है। चाहे गठबंधन हो या ना हो लेकिन मेरी जीत पक्की है।

CLP नेता प्रदीप माथुर (मथुरा): अभी तक पार्टी का फैसला अकेले चुनाव लड़ने का रहा है। चुनाव में अभी वक्त है। परिस्थितियों के हिसाब से फैसला लिया जाएगा।

गयादीन अनुरागी (राठ), अजय कुमार (तमकुही) और अनुराग नारायण सिंह (इलाहाबाद) ने कहा कि जो भी पार्टी फैसले लेगी उसी में खुश रहेंगे।

दो और विधायकों ने गठबंधन की बात मानी लेकिन नाम बताने से इंकार किया।

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