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जमानत कानून पर SC की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने दिए संकेत, जिन राज्‍यों में उसकी पार्टी की सरकार वहां बनाएंगे उदार कानून

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि हमने पिछले 7 वर्षों में सामान्य आधारों पर भी राजद्रोह, यूएपीए आदि जैसे प्रावधानों की गंभीर कार्रवाई देखी है।

जमानत कानून पर SC की टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने दिए संकेत, जिन राज्‍यों में उसकी पार्टी की सरकार वहां बनाएंगे उदार कानून
कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी – Photo Credit – Express Archives

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को जमानत के मामलों को सरल बनाने के लिए अलग जमानत कानून बनाने पर विचार करना चाहिए। सर्वोच्च अदालत की इस टिप्पणी के बाद कांग्रेस ने संकेत दिया है कि जिन राज्यों में उसकी सरकार है, वहां संशोधन के जरिए जमानत कानून को और उदार बनाएगी।

मंगलवार को कांग्रेस ने संकेत दिया कि पार्टी शासित राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में संशोधन लाया जा सकता है और जमानत कानून को उदार बनाया जाएगा। कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि भगवा पार्टी भय और नियंत्रण के जरिए शासन करने की कोशिश कर रही है। इस बीच आईं सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां एक “बहुत आवश्यक मार्गदर्शन” हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि हमने पिछले 7 सालों में सामान्य आधारों पर भी राजद्रोह, यूएपीए आदि जैसे प्रावधानों की गंभीर कार्रवाई देखी है। केंद्र और कई राज्यों में भाजपा की सरकारें इस मामले में सबसे आगे रही हैं।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस शासित राज्य, निश्चित रूप से, अपने संवैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत संशोधन अधिनियमित कर सकते हैं। जो जमानत कानून को उदार बनाएंगे।” सिंघवी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का इरादा है कि संविधान के दायरे में रहकर कांग्रेस शासित राज्यों में एससी दिशानिर्देशों के तहत इस कानून को उदार बनाये।

इसके साथ ही सिंघवी ने सरकार पर न्यायपालिका को डराने, उसके कामकाज में दखल देने और उसके फैसलों को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था: बीते सोमवार(11 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी कैदी को लगातार जेल में रखना और फिर बाद में बरी कर देना उसके प्रति ‘गंभीर अन्याय’ है। अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि जमानत के मामलों को और सरल बनाने के लिए अलग से जमानत कानून बनाने पर विचार करना चाहिए।

मालूम हो कि देशभर की जेलों में कैदियों की संख्या और इनमें भी दो तिहाई से अधिक विचाराधीन कैदी होने के मद्देनजर देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार से यह सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर नियम विशेष रूप से मना न करते हों तो दो सप्ताह में जमानत की याचिकाओं पर फैसला और छह सप्ताह में अग्रिम जमानत की याचिकाओं पर फैसला लिया जाना चाहिए।

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