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MP Government Crisis: कांग्रेस नेता ने कहा- सिंधिया के खानदान ने अंग्रेजों का साथ दिया था, एक बार फिर वे उसी घिनौनी विचारधारा के साथ खड़े हैं

BJP नेता शिवराज सिंह चौहान ने इसके जवाब में कहा- 'जब तक सिंधिया कांग्रेस में थे, तब तक महाराज थे, अब उनके लिए माफिया हो गए। यह दोहरे मापदंड ठीक नहीं।'

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र भोपाल | Updated: March 10, 2020 4:52 PM
मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता अरुण यादव ने सिंधिया पर इस्तीफे के बाद निशाना साधा।

Jyotiraditya Scindia Resignation, Madhya Pradesh Government Crisis: ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस से इस्तीफा देते ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने सिंधिया पर ट्वीट के जरिए निशाना साधते हुए कहा, “ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा अपनाए गए चरित्र को लेकर मुझे जरा भी अफसोस नहीं है। सिंधिया खानदान ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी जिस अंग्रेज हुकूमत और उनका साथ देने वाली विचारधारा की पंक्ति में खड़े होकर उनकी मदद की थी। आज ज्योतिरादित्य ने उसी घिनौनी विचारधारा के साथ एक बार पुनः खड़े होकर अपने पूर्वजों को सलामी दी है।”

अरुण यादव के इस बयान पर भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान ने तंज कसा। उन्होंने कहा, “जब तक सिंधिया कांग्रेस में थे, तब तक महाराज थे, अब उनके लिए माफिया हो गए। कांग्रेस के यह दोहरे मापदंड ठीक नहीं।”

अलका लांबा बोलीं- युवाओं को सौंपी जाए ड्राइविंग सीट: दिल्ली विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल होने वाली अलका लांबा ने भी पार्टी आलाकमान के निर्णयों पर सवाल उठाए। उन्होंने ट्वीट में युवाओं को सत्ता की कमान सौंपने की मांग करते हुए कहा कि जो नेता अब तक ड्राइविंग सीट पर रह चुके हैं (70 पार की उम्र वाले), उन्हें बैकसीट पर आना चाहिए और बैक सीट पर हैं (30 पार के युवा), उन्हें स्टेयरिंग पकड़ना चाहिए।

अरुण यादव के अलावा दिग्विजय सिंह के बेटे और कमलनाथ सरकार में मंत्री जयवर्धन सिंह ने भी सिंधिया के पार्टी छोड़ने पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “झांसी का इतिहास एक बार फिर दोहराया गया। हम अपने लोगों के साथ खड़े होंगे, सत्ता का क्या है, वो तो आती-जाती रहती है। हम अपने सिद्धांत पर अपने लोगों के साथ अडिग खड़े है।” वहीं, मंत्री जीतू पटवारी ने कहा, “एक इतिहास बना था 1857 में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की मौत से, फिर एक इतिहास बना था 1967 में संविद सरकार से और आज फिर एक इतिहास बन रहा है। तीनों में यह कहा गया है कि हां हम है।”

सिंधिया के बेटे ने कहा- ‘पिता पर गर्व है’: ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया ने ट्वीट में कहा, “मुझे गर्व है कि मेरे पिता ने अपने लिए खड़े हुए। एक पार्टी से जुड़े रहने के बाद उसे छोड़ना आसान नहीं। जब मैं ये कहता हूं कि हम सत्ता के भूखे नहीं हैं, तो इतिहास खुद यह बताता है। हमने पहले ही वादा किया है कि भविष्य में हम देश और मध्य प्रदेश में प्रभावी बदलाव लाएंगे।”

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