ताज़ा खबर
 

हो गया मोहभंग? शत्रुघ्न के TMC में जाने की अटकल; मित्रा छोड़ सकते हैं बंगाल FM पद

"बिहारी बाबू" के नाम से प्रसिद्ध सिन्हा ने हाल में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी की प्रशंसा करते हुए उन्हें "वास्तविक रॉयल बंगाल टाइगर" कहा था।

Edited By अभिषेक गुप्ता पटना/कोलकाता | Updated: July 12, 2021 9:52 AM
शत्रुघ्न सिन्हा और अमित मित्रा। (फाइल फोटोः एक्सप्रेस आर्काइव-कमलेश्वर सिंह/फेसबुक-DrAmitMitra)

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शत्रुघ्न सिन्हा जल्द ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। सिन्हा के नजदीकी सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी।

सिन्हा ने हाल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के समर्थन में हिन्दी में एक ट्वीट किया था, जिसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में “घर वापसी” कर सकते हैं। लेकिन सूत्रों के मुताबिक उनका झुकाव तृणमूल कांग्रेस की ओर अधिक है, जिसने हाल में बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा को धूल चटाई है। ममता बनर्जी को 2024 के लोकसभा चुनाव में मोदी का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी माना जा रहा है। पीटीआई-भाषा ने सिन्हा से इस संबंध में जब सवाल पूछा तो उन्होंने स्पष्ट तौर पर कुछ कहने से इनकार कर दिया, लेकिन कहा कि “राजनीति संभावनाएं तलाशने की एक कला है।”

कोलकाता में तृणमूल नेताओं के एक समूह का कहना है कि वह इस संबंध में सिन्हा से बातचीत कर रहे हैं और बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि शत्रुघ्न सिन्हा के संबंध बनर्जी के साथ हमेशा से ही बेहतर रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि सिन्हा के 21 जुलाई को ‘शहीद दिवस’ कार्यक्रम में तृणमूल में शामिल होने की संभावना है। “बिहारी बाबू” के नाम से प्रसिद्ध सिन्हा ने हाल में संपन्न हुए बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी की प्रशंसा करते हुए उन्हें “वास्तविक रॉयल बंगाल टाइगर” कहा था। पटना साहिब लोकसभा सीट से दो बार के भाजपा सांसद रह चुके सिन्हा कांग्रेस में शामिल हो गए थे और 2019 के लोकसभा चुनाव में उसी निर्वाचन क्षेत्र से मैदान में उतरे थे, लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

उधर, प्रख्यात अर्थशास्त्री और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमित मित्रा पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री के पद से इस्तीफा दे सकते हैं और यहां तक कि खराब स्वास्थ्य के कारण सक्रिय राजनीति से संन्यास भी ले सकते हैं। टीएमसी के वरिष्ठ नेता ने गोपनीयता की शर्त पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘अमित दा राज्य के वित्त मंत्री के पद पर नहीं बने रहेंगे। उन्हें चार नवंबर को निर्वाचित हुए बिना इस पद पर बने हुए छह महीने पूरे हो जाएंगे। उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को सूचित कर दिया है कि वह खराब सेहत के कारण राजनीति और प्रशासन में बने रहना नहीं चाहते।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के जोर देने पर मित्रा ने इस साल मई में तीसरी बार पार्टी के सत्ता में लौटने के बाद राज्य के वित्त मंत्री का प्रभार संभाल लिया था।’’ एक अन्य टीएमसी नेता ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मित्रा के इस्तीफा देने के बाद मुख्यमंत्री अगला वित्त मंत्री नियुक्त होने तक कुछ समय के लिए इस विभाग को अपने पास रखेंगी।

मित्रा 2011 से उत्तर 24 परगना में खारदा निर्वाचन क्षेत्र से दो बार विधायक रहे। वित्त विभाग के अलावा उन्होंने 2014 से 2021 तक उद्योग विभाग भी संभाला। खराब स्वास्थ्य के कारण मित्रा फरवरी में लेखानुदान पेश किये जाने और पिछले हफ्ते राज्य का बजट पेश किये जाने के दौरान मौजूद नहीं रहे। हालांकि, बजट उन्होंने ही तैयार किया था लेकिन उनकी तरफ से फरवरी में मुख्यमंत्री ने लेखानुदान और पिछले हफ्ते राज्य के संसदीय कार्य मंत्री पार्थ चटर्जी ने बजट पेश किया था।

भारतीय उद्योग एवं वाणिज्य महासंघ (फिक्की) के पूर्व महासचिव मित्रा 2009 से बनर्जी की फैसला लेने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में 2011 में पार्टी के सत्ता में आने के बाद मित्रा को बनर्जी की मंत्रिपरिषद् में शामिल किया गया और उन्हें कर्ज के बोझ से दबे राज्य के वित्त विभाग का प्रभार दिया गया। 73 साल के मित्रा ने इस साल विधानसभा चुनाव भी नहीं लड़ा था।

Next Stories
1 हरियाणाः विधानसभा उपाध्यक्ष की कार पर हमला, किसानों ने तोड़े शीशे
2 कांवड़ यात्रा में अगर एक भी शख्स की कोरोना से मौत हुई तो भगवान भी नहीं करेंगे माफ- बोले सीएम धामी
3 श्रीनगरः 60 साल पहले मरे शख्स को लगे कोरोना के दोनों टीके
यह पढ़ा क्या?
X