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गुलाम नबी की भावुक विदाई पर बोले शशि थरूर, मोदी की कला का प्रदर्शन, कहा- टिकैत के आंसू क्यों नहीं दिखे?

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि भाषण के दौरान प्रधानमंत्री का भावुक होना एक मंझा हुआ कला प्रदर्शन था। जिसमें उन्होंने किसान नेता राकेश टिकैत के आंसू का जवाब देते हुए दिखाया कि उनके पास भी आंसू हैं।

shashi tharoorकांग्रेस नेता शशि थरूर (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)।

मंगलवार को राज्यसभा में चार सदस्यों के विदाई समारोह के अवसर पर प्रधानमंत्री भावुक हो गए थे। प्रधानमंत्री के भावुक होने पर कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि वह एक कला प्रदर्शन था। साथ ही थरूर ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को टिकैत के आंसू नहीं दिखे।

पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की पुस्तक ‘बाई मेनी ए हैपी एक्सीडेंट: रिकलेक्सन ऑफ ए लाइफ’ पर आयोजित एक कार्यक्रम में कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि भाषण के दौरान प्रधानमंत्री का भावुक होना एक मंझा हुआ कला प्रदर्शन था। जिसमें उन्होंने किसान नेता राकेश टिकैत के आंसू का जवाब देते हुए दिखाया कि उनके पास भी आंसू हैं।

बीते मंगलवार को राज्यसभा में चर्चा के दौरान पीएम मोदी ने भावुक होते हुए कहा था कि गुलाम नबी जी जब मुख्यमंत्री थे, तो मैं भी एक राज्य का मुख्यमंत्री था। हमारी बहुत गहरी निकटता रही। एक बार गुजरात के कुछ यात्रियों पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया था, उसमें 8 लोग मारे गए थे। सबसे पहले गुलाम नबी जी का मुझे फोन आया। उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। साथ ही उन्होंने कहा कि गुलाम नबी जी उस रात को एयरपोर्ट पर थे। उन्होंने मुझे फोन किया और जैसे अपने परिवार के सदस्य की चिंता करते हैं, वैसी चिंता वो कर रहे थे. सत्ता जीवन में आते रहती है लेकिन उसे कैसे पचाना ये कोई गुलाम जी से सीखे। मेरे लिए वो बड़ा भावुक पल था।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक मित्र के रूप में घटनाओं और अनुभव को देखते हुए मैं आजाद का बहुत आदर करता हूं। साथ ही उन्होंने कहा कि जब वह कोविड-19 महामारी पर सदन के विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक बुलाने पर विचार कर रहे थे तब गुलाम नबी जी ने मुझे फोन कर सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक को बुलाने का सुझाव दिया था। मैंने वह सुझाव माना और वह सुझाव उपयोगी रहा। 

आपको बता दूँ कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा के बाद जब प्रशासन ने गाजीपुर में चल रहे आंदोलन को समाप्त करने के लिए किसानों को अल्टीमेटम दिया था तो किसान नेता राकेश टिकैत अपनी बात कहते हुए रों पड़े थे। किसान नेता राकेश टिकैत के रोने बाद एक बार फिर से हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के किसान दिल्ली से सटे सभी सीमाओं पर जुटने लगे थे।

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