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सवालों से झुंझलाए सैफुद्दीन सोज माइक छोड़ एंकर से बोले- जाहिल दफा हो जाओ, दल्‍ला कहीं का!

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफुद्दीन सोज ने एक बार फिर से विवादित बयान दिया है। उन्होंने टीवी एंकर को जाहिल और दल्ला करार दिया। पूर्व केंद्रीय मंत्री इस हद तक नाराज हुए कि लाइव डिबेट को बीच में ही छोड़ कर चलते बने।

Author नई दिल्ली | Updated: June 28, 2018 8:30 PM
कश्मीर के कांग्रेस नेता सैफुद्दीन सोज। फोटो- एक्सप्रेस आर्काइव

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैफद्दीन सोज का विवादों से पीछा नहीं छूट रहा है। वरिष्ठ राजनेता अपनी किताब ‘कश्मीर: ग्लिम्पसेज ऑफ हिस्ट्री एंड द स्टोरी ऑफ स्ट्रगल’ में कश्मीर को लेकर इन दिनों सुर्खियां बटोर रहे हैं। इसके साथ ही कश्मीर जैसे संवेदनशील मसले पर विवादित बयान देने से भी नहीं चूक रहे हैं। ऐसे ही एक बयान में सोज ने कहा था कि देश को एक सूत्र में बांधने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल कश्मरी को पाकिस्तान के हवाले करने के लिए तैयार थे, लेकिन हैदराबाद पर बात करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। उनके इस बयान पर बवाल शुरू हो गया है। एक निजी टीवी चैनल ने कांग्रेस नेता से इस बयान पर प्रतिक्रया मांगी तो वह इतने नाराज हुए कि न्यूज चैनल के एंकर को ही ‘दल्ला’ कह बैठे और लाइव डिबेट को बीच में ही छोड़ कर चलते बने। दरअसल, एकंर ने उनसे पूछा कि उन्होंने सरदार पटेल पर किन दस्तावेज के आधार पर इतना गंभीर आरोप लगाया है। ऐसे दस्तावेज को सार्वजनिक तौर पर सामने रखें या उसके बारे में जानकारी दें। इस पर सैफुद्दीन सोज बेहद नाराज हो गए। सरदार पटेल पर लगाए गए लांछन पर सवाल पूछने पर उन्होंने कहा, ‘आप (न्यूज चैनल का एंक) बहुत जाहिल आदमी हैं। आपको पता ही नहीं सरदार पटेल कितने बड़े नेता थे…दफा हो जाओ यहां से…मैं सरदार पटेल को उतना ही बड़ा लीडर मानता हूं जितान पंडित जवाहरलाल नेहरू को। …ये कौन है दल्ला कहीं का…यह कौन है जो मेरी बात नहीं सुन रहा, सिर्फ अपनी कह रहा है। यह कौन सा चैनल है?’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सैफुद्दीन सोज द्वारा कश्मीर और पटेल को लेकर दिए गए बयानों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने उनके पुस्तक विमोचन समारोह में जाने से मना कर दिया था। कांग्रेस की ओर से सिर्फ जयराम रमेश इसमें शामिल हुए थे। सोज ने कहा, ‘सरदार वल्लभभाई पटेल व्यावहारिक आदमी थे। वह पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान को कश्मीर देने के लिए तैयार थे, क्योंकि वह जंग टालना चाहते थे। उन्होंने लियाकत से ये भी कहा था कि हैदराबाद के बारे में नहीं, कश्मीर के बारे में बात करो। कश्मीर ले लो, हैदराबाद नहीं।’ सोज ने कश्मीर मसले पर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का भी जिक्र किया था। कांग्रेस नेता ने कहा था, ‘मुशर्रफ कहते थे कि कश्मीरियों की पहली पसंद तो आजादी है। मुशर्रफ का बयान तब भी सही था और आज भी सही है।’ भाजपा ने उनके इस बयान की आलोचना की थी तो वहीं कांग्रेस ने सोज के बयान से दूरी बना ली थी। अपनी किताब के विमोचन समारोह में सोज ने कहा था, ‘कश्मीर समस्या सुलझाने का एक ही रास्ता है कि सभी दल साथ आएं और बैठकर बात करें। आजादी कोई हल नहीं है। भारत के संविधान में कश्मीर को जगह मिलनी चाहिए। मुशर्रफ दोनों तरफ के कश्मीर की स्वायत्तता चाहते थे। खूनखराबा कश्मीर की समस्या को हल नहीं कर सकता। चाहे तो कश्मीरियों को मार दीजिए, लेकिन इससे समस्या सुलझ नहीं सकती।’ इस विमोचन समारोह में जयराम रमेश के अलावा कोई अन्य कांग्रेस नेता नहीं पहुंचा।

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