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War Memorial: पीएम मोदी पर भड़की कांग्रेस, बोली- पद की गरिमा तो गिरा दी, अब शर्मनाक व्‍यवहार से इसे राजनीति का अखाड़ा मत बनाइए

कांग्रेस ने बोफोर्स तथा अन्य मामलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हमले पर पलटवार करते हुए कहा कि मोदी को राष्ट्रीय युद्ध स्मारक को राजनीति का अखाड़ा नहीं बनाना चाहिए।

Author Updated: February 26, 2019 7:58 AM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वार मेमोरियल का उद्घाटन किया। (Photo: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (25 फरवरी) को राष्ट्रीय समर स्मारक (नेशनल वार मेमोरियल) राष्ट्र के नाम समर्पित कर दिया। यह स्मारक आजादी के बाद देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों के सम्मान में बनाया गया है। नई दिल्ली के इंडिया गेट परिसर में बनाया गया यह स्मारक 40 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला है। मोदी ने स्मारक के उद्घाटन से पहले कांग्रेस की पुरानी सरकार पर सेना को कमाई का साधन बनाने का आरोप लगाया। इस पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने कहा कि ‘अपने पद की गरिमा तो गिरा ही दी, वॉर मेमोरियल को राजनीतिक अखाड़ा न बनाएं’।

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘आदरणीय मोदी जी, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक देश के जवानों की कुर्बानी का प्रतीक है। अपने शर्मनाक व्यवहार एवं चुनावी भाषण से इसे राजनीति का अखाड़ा मत बनाइये। अपने पद की गरिमा तो गिरा ही दी। अब वीरों की भूमि पर राजनीतिक गाली-गलौच बंद करें।’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘हम युद्ध स्मारक के साथ खड़े हैं। प्रधानमंत्री को बताना है कि हम अपने जवानों की जिंदगी कैसे बचाएंगे।’’ उन्होंने कहा कि स्मारक अच्छी बात है और अपने प्राण न्योछावर करने वालों को याद करना चाहिए, लेकिन जमीन पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।

सिब्बल ने सवाल किया कि उरी औेर पुलवामा जैसे हमलों को रोकने लिए सरकार की क्या योजना है? गौरतलब है कि युद्ध स्मारक के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बोफोर्स से लेकर हेलीकॉप्टर तक, सारी जांच का एक ही परिवार तक पहुंचना, बहुत कुछ कह जाता है। अब यही लोग पूरी ताकत लगा रहे हैं कि भारत में राफेल विमान न आ पाए।

वहीं, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन एक ‘‘महत्वपूर्ण घटना’’ है तथा देश के पास अब ‘‘एक और तीर्थस्थल’’ है जहां लोग आकर अपने वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि दे सकते हैं। नेशनल स्टेडियम में भूतपूर्व सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि स्वतंत्रता के बाद प्राणों का बलिदान करने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए ‘‘हमारा स्वयं का युद्ध स्मारक होने की अत्यधिक आवश्यकता थी।’’

सीतारमण ने कहा, ‘‘इसे ऐसे अद्भुत तरीके से डिजाइन किया गया है कि ऐसा लगता है कि यह काफी पहले से था। हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि भारतीयों के लिए अब एक और तीर्थस्थल है। हम उम्मीद करते हैं कि प्रत्येक नागरिक हमारे वीर सैनिकों को इस स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करेगा।’’ स्मारक उन सैनिकों को श्रद्धांजिल अर्पित करता है जिन्होंने 1962 में भारत-चीन युद्ध, 1947 में भारत-पाक युद्ध, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों, श्रीलंका में शांति अभियान और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों के दौरान तथा 1999 में कारगिल संघर्ष के दौरान अपने प्राण न्योछावर किए थे।

रक्षामंत्री ने कहा, ‘‘प्रथम विश्वयुद्ध और अफगानिस्तान-वजीरिस्तान संघर्ष के बाद स्वतंत्रता से पहले के युग में इंडिया गेट के रूप में एक स्मारक का निर्माण किया गया। 1972 में इसके नीचे 1971 के भारत-पाक युद्ध की स्मृति में अमर जवान ज्योति रखी गई।’’ उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद हमारे राष्ट्रीय हित में, देश की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा करते हुए 25 हजार से अधिक सैनिकों ने अपना बलिदान दिया है। वर्ष 2014 में संसद के संयुक्त सत्र के दौरान राष्ट्रपति ने सैनिकों की वीरता के सम्मान में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक बनाने की प्रतिबद्धता जताई थी। सीतारमण ने कहा, ‘‘आज प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने उस प्रतिबद्धता को पूरा कर दिया है।’’

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