कांग्रेस पार्टी नहीं, विचार है- बोले कन्हैया, राहुल गांधी ने कहा- झूठ के साम्राज्य में सच से ही क्रांति आती है

पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने भारत के विचार को बचाने के लिए निडर होकर संघर्ष किया। हम एक साथ खड़े होंगे – एकजुट और निडर – ऐसा ही करने के लिए।”

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी में शामिल हुए जेएनयू के पूर्व छात्र नेता कन्हैया कुमार। (फोटो- सोशल मीडिया)

पूर्व सीपीआई नेता कन्हैया कुमार और गुजरात के निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी ने मंगलवार को नई दिल्ली में कांग्रेस की सदस्यता ले ली। इस मौके पर कन्हैया कुमार ने कहा कि “मैं कांग्रेस में शामिल हो रहा हूं क्योंकि यह सिर्फ एक पार्टी नहीं है, यह एक विचार है। यह देश की सबसे पुरानी और सबसे लोकतांत्रिक पार्टी है, और मैं ‘लोकतांत्रिक’ पर जोर दे रहा हूं… सिर्फ मैं ही नहीं कई लोग सोचते हैं कि देश कांग्रेस के बिना नहीं रह सकता…।” उनको पार्टी की सदस्यता दिलाते हुए पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि “झूठ के साम्राज्य में सच से ही क्रांति आती है। कहा कि नए-पुराने सभी साथियों को मिलकर इस सत्याग्रह में भाग लेना होगा। हमारे पूर्वजों ने भारत के विचार को बचाने के लिए निडर होकर संघर्ष किया। हम एक साथ खड़े होंगे – एकजुट और निडर – ऐसा ही करने के लिए।”

इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि किसानों का अहिंसक सत्याग्रह आज भी अखंड है, लेकिन शोषण-कार सरकार को ये नहीं पसंद है। उन्होंने कहा कि झूठ बोलकर जनता को बहुत दिनों तक भ्रम में नहीं रखा जा सकता है। जनता इसकाे समझती है और उचित समय पर जवाब देती है।

मेवाणी, जो वर्तमान में गुजरात के से निर्दलीय विधायक हैं और वडगाम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच (आरडीएएम) के संयोजक भी हैं। वह एक वकील-कार्यकर्ता और एक पूर्व पत्रकार हैं। मेवाणी का कांग्रेस में प्रवेश ऐसे समय में हुआ है जब पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री को चुनकर अनुसूचित जाति समुदाय को पार्टी अपनी ओर खींचने का प्रयास कर रही है।

जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि “मैं तकनीकी कारणों से औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल नहीं हो सका। मैं एक निर्दलीय विधायक हूं, अगर मैं किसी पार्टी में शामिल होता हूं, तो मैं विधायक के रूप में नहीं रह सकता…। मैं वैचारिक रूप से कांग्रेस का हिस्सा हूं। आगामी गुजरात चुनाव कांग्रेस के चुनाव चिह्न से लड़ूंगा।”

इस बीच कांग्रेस के लिए पंजाब में नया संकट पैदा हो गया है। हाल ही में पंजाब में राज्य कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए नवजोत सिंह सिद्धु ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सिद्धू का पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से विवाद चल रहा था। उनको अध्यक्ष बनाए जाने के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद राज्य में पहली बार एक दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया गया था।

ऐसा माना जा रहा था कि अब सीएम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के अच्छे संबंध होने से पार्टी कुछ महीनों बाद होने जा रहे विधान सभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करेगी, लेकिन मंगलवार को सिद्धू के इस्तीफे से स्थितियां फिर बिगड़ गई हैं।

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