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“बजट भाषण में सरकार भूल गई अच्छे दिनों के खोखले वादे” चिदंबरम बोले – बेरोजगारी, खपत घटने से बढ़ा आर्थिक संकट

नोटबंदी को बड़ी भूल करार देते हुए चिदंबरम ने कहा कि सरकार अपनी गलतियां मानने से इंकार कर देती है। उन्होंने कहा "जल्दबाजी में बिना किसी तैयारी के माल एवं सेवा कर को कार्यान्वित कर देना दूसरी बड़ी भूल थी। इसकी वजह से आज अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है।"

Author Edited By Sanjay Dubey नई दिल्ली | Updated: February 10, 2020 2:06 PM
राज्य सभा में बोलते पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम (फाइल फोटो – एएनआई)

कांग्रेस नेता और पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि देश में आर्थिक संकट की वजह मोदी सरकार की अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करने में नाकामी है। बोले बढ़ती बेरोजगी और खपत में कमी के चलते देश के सामने गंभीर अर्थ संकट खड़ा हो गया है। इसके बावजूद मोदी सरकार पूर्ववर्ती कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को जिम्मेदार ठहराती है। सोमवार को राज्य सभा में 2020-21 के लिए केंद्रीय बजट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चिदंबरम ने सरकार को ‘अक्षम डाक्टर’ बताया और बोले कि देश में भय और अनिश्चितता का माहौल है, ऐसे में कोई निवेश क्यों करेगा।

उन्होंने कहा “मैंने वित्त मंत्री का पूरा बजट भाषण सुना था, जो 116 मिनट तक चला था। इस बात की खुशी हुई कि उन्होंने पूरे बजट भाषण में एक बार भी यह नहीं कहा कि अच्छे दिन आने वाले हैं। वह खोखले वादे भूल गईं, यह अच्छा रहा।” नोटबंदी को बड़ी भूल करार देते हुए चिदंबरम ने कहा कि सरकार अपनी गलतियां मानने से इंकार कर देती है। उन्होंने कहा “जल्दबाजी में बिना किसी तैयारी के माल एवं सेवा कर को कार्यान्वित कर देना दूसरी बड़ी भूल थी। इसकी वजह से आज अर्थव्यवस्था तबाह हो गई है।”

उन्होंने कहा कि छह साल से अर्थव्यवस्था का प्रबंधन करने के बावजूद इसकी कमियों के लिए पूर्ववर्ती संप्रग सरकार को दोषी ठहराया जा रहा है। कहा कि सरकार लगातार नकारती रही है लेकिन सच तो यह है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति बहुत बुरी है। उन्होंने कहा कि पिछली छह तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर लगातार कम हुई है। कहा, “पहले कभी ऐसा नहीं हुआ।” उन्होंने कहा कि बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है और खपत लगातार कम हो रही है जिसकी वजह से देश के सामने अर्थ संकट बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा “सरकार का मानना है कि समस्या क्षणिक है लेकिन आर्थिक सलाहकारों का मानना है कि ढांचागत समस्या अधिक है। दोनों ही हालात में समाधान अलग अलग होंगे। किंतु पूर्व से तय मानसिकता के चलते आप स्वीकार ही नहीं करना चाहते कि आर्थिक हालात बदतर हैं।” पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा “आर्थिक सर्वेक्षण सरकार की आर्थिक सोच का परिचायक होता है। यह राष्ट्र के लिए बहस की जमीन तैयार करता है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि बजट में आर्थक सर्वेक्षण का जिक्र ही नही है। होना तो यह चाहिए था कि बजट में आर्थिक सर्वेक्षण के अच्छे विचार लिए जाते, उन पर चर्चा की जाती और वित्त मंत्री कहतीं कि इन्हें बाद में ही सही, लागू किया जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।”

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की अभी तक यह प्रवृत्ति रही है कि वह हर चीज के लिए पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर दोष मढ़ देती है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही होता तो मनमोहन सिंह सरकार सारा दोष अटल बिहारी वाजपेयी सरकार पर और वाजपेयी सरकार को हर समस्या का दोष पीवी नरसिंहा राव सरकार पर मढ़ देना चाहिए था।

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