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केंद्र सरकार ने लौटाया जस्टिस जोसेफ का नाम, पी चिदंबरम ने पूछा- सुप्रीम कोर्ट जज नहीं बनाने की वजह राज्य, धर्म या उनका फैसला?

जस्टिस के एम जोसेफ ने अपने फैसले में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के केंद्र सरकार के निर्णय को 2016 में गलत करार दिया था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि क्या मोदी सरकार कानून से ऊपर है?

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाए जाने पर अपनी सहमति दे दी है जबकि उत्तराखंड हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस के एम जोसेफ को प्रोन्नति देकर सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने संबंधी सिफारिश को वापस सुप्रीम कोर्ट भेज दिया है। अगर कॉलेजियम दोबारा जस्टिस जोसेफ के नाम की सिफारिश करता है तो सरकार को बाध्य होना पड़ सकता है।इधर,  इंदु मल्होत्रा वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनने वाली पहली महिला होंगी। अब माना जा रहा है कि वो शुक्रवार (27 अप्रैल) को शपथ ले सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट की पांच सीनियर जजों की कॉलेजियम ने 10 जनवरी को ही दोनों के नाम की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी लेकिन सरकार द्वारा फाइल दबा लेने के बाद कॉलेजियम ने दोबारा इन दोनों नामों को फरवरी के पहले हफ्ते में कानून मंत्रालय को भेजा था। इसके बाद सरकार ने सिर्फ इंदु मल्होत्रा के फाइल को ही खुफिया ब्यूरो (आईबी) के पास भेजा था। वहां से क्लियरेंस मिलने के बाद सरकार ने इंदु मल्होत्रा के नाम का एलान कर दिया।

कॉलेजियम की सिफारिश पर दो नामों में से सिर्फ एक को जज बनाए जाने पर कई लोगों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पूर्व सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने लगातार कई ट्वीट्स कर लिखा है, “मैं चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से गुजारिश करूंगी कि वो इंदु मल्होत्रा को फिलहाल पद की शपथ न दिलाएं, जब तक के जस्टिस के एम जोसेफ का नाम सरकार क्लियर ना कर दे। न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा किसी भी कीमत पर होनी चाहिए।”

इधर, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है और कहा है कि क्या मोदी सरकार कानून से ऊपर है? उन्होंने ट्वीट किया है, “जैसा कि कानून कहता है, सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति के मामले में कॉलेजियम की सिफारिश बाध्यकारी और अंतिम होता है। क्या मोदी सरकार कानून से ऊपर है?” उन्होंने दूसरे ट्वीट में लिखा है, “जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति क्यों रोकी गई? क्या उनका राज्य या धर्म या फिर उत्तराखंड मामले में दिया गया उनका फैसला उनकी राह में रोड़ा है?” बता दें कि जस्टिस के एम जोसेफ ने अपने फैसले में उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू करने के केंद्र सरकार के निर्णय को 2016 में गलत करार दिया था।

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