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मोदी सरकार पर बरसे मनमोहन सिंह, कहा- नोटबंदी का बुरा असर अब तक जारी, चरम पर है बेरोजगारी

आर्थिक विषयों के ‘थिंक टैंक’ राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज द्वारा डिजिटल माध्यम से आयोजित एक विकास सम्मेलन का उदघाटन करते हुए मनमोहन सिंह ने मोदी सरकार को घेरा।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र तिरुवनंतपुरम | March 3, 2021 9:07 AM
Manmohan Singh, PM Narendra Modiमनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी ( स्रोत-इंडियन एक्सप्रेस)।

देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने केरल के तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि 2016 में भाजपा नीत सरकार द्वारा बगैर सोच-विचार के लिए गए नोटबंदी के फैसले के चलते देश में बेरोजगारी चरम पर है, और अनौपचारिक क्षेत्र खस्ताहाल है। उन्होंने राज्यों से नियमित रूप से परामर्श नहीं करने को लेकर भी केंद्र की (प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी सरकार की आलोचना की।

आर्थिक विषयों के ‘थिंक टैंक’ राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज द्वारा डिजिटल माध्यम से आयोजित एक विकास सम्मेलन का उदघाटन करते हुए मनमोहन सिंह ने कहा कि बढ़ते वित्तीय संकट को छिपाने के लिए भारत सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा किये गए अस्थायी उपाय के चलते आसन्न रिण संकट से छोटे और मंझोले (उद्योग) क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम इस स्थिति की अनदेखी नहीं कर सकते हैं।

उन्होंने ‘प्रतीक्षा 2030’ में कहा कि बेरोजगारी चरम पर है और अनौपचारिक क्षेत्र खस्ताहाल है। यह संकट 2016 में बगैर सोच-विचार के लिए गए नोटबंदी के फैसले के चलते पैदा हुआ है। पूर्व प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “केरल और कई अन्य राज्यों में सार्वजनिक वित्तीय संस्थान अव्यवस्था के शिकार हैं और राज्य लगातार ज्यादा उधारी पर उतर रहे हैं, जिससे आगामी बजटों पर अवहनीय बोझ पड़ रहा है।”

सोनिया गांधी बोलीं- केरल में सामाजिक सद्भाव और सौहार्द अब तनाव में: बता दें कि सम्मेलन का आयोजन एक दृष्टि पत्र पेश करने के लिए किया गया है, जो केरल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के विकास पर विचारों का एक प्रारूप है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने भी केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा, “केरल देश के अन्य हिस्सों और कहें तो दुनिया को यह सबक देता है कि कैसे सामाजिक सद्भाव व सौहार्द का संरक्षण और संवर्धन करें। लेकिन अब यह दबाव और तनाव में है और भविष्य की विकास की रणनीति में भाइचारे के बंधन को मजबूती दी जानी चाहिए। यह न केवल इसके मूल उद्देश्यों में से एक हैं, बल्कि केरल के अद्भुत विविध समाज की पहचान रहा है।”

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