लोकतांत्रिक संत न बने BJP, जाकर देखे पीछे का रिकॉर्ड- कांग्रेसी अधीर रंजन चौधरी का वार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि सरकार लोकतंत्र का संत बनने का प्रयास कर रही है लेकिन अपना पुराना रेकॉर्ड नहीं देख रही है।

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लोकसभा में अपनी बात रखते हुए अधीर रंजन चौधरी। फोटो- पीटीआई

पेगासस मामले को लेकर कई दिनों से संसद में विपक्ष हंगामा कर रहा है। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि यह कोई मुद्दा नहीं है और विपक्षी दल केवल कार्यवाही रोकने के मक़सद से शोर-शराबा करते हैं। इस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि सरकार पूरे विपक्ष को नजरअंदाज कैसे कर सकती है? यह सरकार लोकतंत्र का संत बनने की कोशिश कर रही है। जब वे विपक्ष में थे, तब उनका रेकॉर्ड कैसा था? स्वर्गीय अरुण जेटली कहा करते थे कि हंगामा भी संसदयी लोकतंत्र का एक हिस्सा है। भाजपा के नेता ये सारी बातें भूल गए।

चौधरी ने कहा कि अब संसद में बिना किसी चर्चा के ही बिल पास हो जाते हैं। विपक्षी की आवाज ही नहीं सुनी जाती है। जी हां, हम मांग कर रहे हैं कि संसद में प्रधानमंत्री या गृह मंत्री की उपस्थिति में पेगासस पर चर्चा हो। यह हमारा अधिकार है। कांग्रेस नेता ने कहा, सर्वदलीय बैठक में हमने कहा था कि सभी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। हम दिल्ली के नहीं हैं बल्कि दूर-दूर से आते हैं और अपने क्षेत्र के लोगों की परेशानियों को लेकर आते हैं। ऐसे में हमें बोलने का अधिकार मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘विपक्ष का काम है कि जब सरकार कुछ गलत कर रही हो तो उसे सावधान करे। मैंने स्पीकर ओम बिड़ला से कहा भी कि अगर विपक्ष ने न साथ दिया होता तो पिछले सत्र में इतने बिल कैसे पास हो जाते। हम लोग आधी रात तक बैठे रहते थे। तभी तो संसद का काम काज इतनी तेजी से हुआ। आप कैसे कह सकते हैं कि हम सहयोग नहीं कर रहे?’

पेगासस से कथित जासूसी के मामले में उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया इसपर चर्चा कर रही है और भारत का नाम हर जगह लिया जा रहा है तो इस सरकार को क्या दिक्कत है। हंगरी में मंत्रियों के इस्तीफे मांगे जा रहे हैं। इस देश में सरकार ने क्यों चुप्पी साध ली है। उन्होंने कहा कि सरकार दूसरे मुद्दों के आगे इस गंभीर मामले को दबा देना चाहती है।

संसद में मंत्री का पेपर फाड़ने पर बोले अधीर
अधीर रंजन चौधरी में संसद भवन में मंत्री के पेपर छीनकर फाड़े जाने की घटना को गलत बताया। उन्होंने कहा कि सरकार के रवैये की वजह से हमारे सांसद भी अधीर हो गए थे। यह गलत था। मैं इससे खुश नहीं हूं। लेकिन सरकार ऐसा करने पर मजबूर करती है।

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