BRICS Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद कांग्रेस ने चार सवाल पूछे हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि पीएम मोदी ने बीजिंग के सामने सोच-समझकर आत्मसमर्पण कर दिया है।

कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने रविवार को अपने X हैंडल पर सवाल किया, “क्या 19 जून, 2020 को चीन को दी गई आपकी कुख्यात क्लीन चिट ने भारत को कमजोर नहीं किया?”

जयराम रमेश ने पूछा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख एवं अब अरुणाचल प्रदेश में चीन को क्षेत्रीय बढ़त हासिल करने की अनुमति क्यों दी।

सीमा पर शांति और स्थिरता जरूरी- मोदी

जयराम रमेश की इस टिप्पणी से एक दिन पहले शनिवार को प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कहा था कि भारत-चीन संबंधों के विकास के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बेहद आवश्यक है। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों में लगातार हो रही प्रगति का स्वागत किया था।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर हुई बातचीत में दोनों नेताओं ने इस बात को दोहराया कि दोनों देशों को अपने संबंधों को रणनीतिक एवं दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए और मतभेदों को विवादों में नहीं बदलना चाहिए।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, ”15-16 जून, 2020 की रात गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ आमने-सामने की लड़ाई में हमारे 20 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था और यह 45 साल में सीमा पर इस तरह जान गंवाने की पहली घटना थी।” रमेश ने कहा, ”इसके सिर्फ चार दिन बाद 19 जून, 2020 को आपने सर्वदलीय बैठक में बिना किसी स्पष्ट कारण के कहा था, ‘न कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है।’ इस बयान को कभी वापस नहीं लिया गया। क्या इससे बाद की बातचीत में हमारी स्थिति काफी कमजोर नहीं हुई?”

कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि पूर्वी लद्दाख के बड़े हिस्से में गश्त और चराई के हमारे परंपरागत अधिकार चुपचाप लेकिन निश्चित रूप से छोड़ दिए गए हैं।

चीनी अतिक्रमण का मुद्दा उठाया

रमेश ने दावा किया कि इस बीच अरुणाचल प्रदेश में चीनी अतिक्रमण की खबरें भी सामने आई हैं जिनमें भारत की कुछ गश्ती चौकियों तक पहुंच खत्म होने और नया गतिरोध पैदा होने की खबरें भी शामिल हैं। कांग्रेस नेता ने बयान में कहा, ”अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन का रुख और सख्त हुआ है। वह शहरों के नाम बदल रहा है, उस क्षेत्र पर फिर दावा जता रहा है जिसे वह ‘दक्षिण तिब्बत’ कहता है और ब्रह्मपुत्र के ‘ग्रेट बेंड’ पर 60,000 मेगावाट की मेदोग महाबांध परियोजना को आगे बढ़ा रहा है। यह परियोजना उसे हमारे पूरे पूर्वोत्तर की जल सुरक्षा पर दबदबा बनाने की स्थिति में ला देती है।”

भारत का रुख नरम क्यों पड़ने दिया?

जयराम रमेश ने पूछा कि प्रधानमंत्री ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के समर्थन में चीन की भूमिका को लेकर भारत का रुख नरम क्यों पड़ने दिया। उन्होंने कहा, ”चार जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सैन्य प्रतिष्ठान के इस आकलन का सार्वजनिक रूप से उल्लेख किया था कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान की सहायता करने में चीन की गहरी और अहम भूमिका थी लेकिन अचानक 25 अगस्त, 2026 को पूर्व प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान ने वीआईएफ (विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन) में दिए एक व्याख्यान में बिल्कुल अलग रुख अपनाया।”

कांग्रेस महासचिव रमेश ने पूछा कि प्रधानमंत्री ने चीन के साथ व्यापार घाटे को रिकॉर्ड स्तर तक क्यों पहुंचने दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया जिससे खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) समेत भारतीय उद्योग के बड़े हिस्से को नुकसान हुआ।

जयराम रमेश ने अंत में कहा, ”प्रधानमंत्री जी, चीन के साथ भारत के संबंधों को सामान्य बनाना एक बात है लेकिन आपकी ओर से जो दिखाई दे रहा है, वह सुनियोजित आत्मसमर्पण है।”

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ब्रिक्स ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्था का एक गठबंधन है। पाकिस्तान ने 2023 में BRICS में शामिल होने के लिए मेंबरशिप के लिए अप्लाई किया था लेकिन इस ग्रुप में भारत के वीटो पावर ने पाकिस्तान को BRICS से बाहर रखा है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।