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‘कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के प्रस्ताव से पाकिस्तान को मिलेगी खुशी’, रविशंकर प्रसाद बोले- सपा, बसपा, टीएमसी के शामिल नहीं होने से विपक्षी एकता बिखरी

केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि 'इस बैठक में विपक्षी एकता बेनकाब हो गई है, क्योंकि कई बड़ी राजनैतिक पार्टियों जैसे सपा, बसपा, टीएमसी और आप ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया।'

ravi shankar prasadभाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी पार्टियों पर साधा निशाना। (ani image)

दिल्ली में आज कांग्रेस समेत 20 विपक्षी दलों की संयुक्त बैठक हुई। इस बैठक में देश के मौजूदा हालात पर चर्चा की गई। इस बैठक में संशोधित नागरिकता कानून, एनआरसी, अर्थव्यवस्था, किसानों के मुद्दों आदि पर सरकार की कार्यप्रणाली पर चिंता जाहिर की। वहीं विपक्षी दलों की इस बैठक पर भाजपा ने निशाना साधा है। केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ‘इस बैठक में विपक्षी एकता बेनकाब हो गई है, क्योंकि कई बड़ी राजनैतिक पार्टियों जैसे सपा, बसपा, टीएमसी और आप ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया।’

केन्द्रीय मंत्री ने आगे कहा कि ‘विपक्षी दलों की बैठक में आज जो प्रस्ताव पास हुआ है, उससे पाकिस्तान को बहुत खुशी होगी।’ उल्लेखनीय है कि विपक्षी दलों की इस बैठक से कई बड़ी पार्टियों के प्रतिनिधि गायब मिले। जिसके बाद विपक्षी एकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बता दें कि विपक्षी दलों की बैठक के बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी युवाओं की समस्याएं सुनने के बजाय देश का ध्यान हटाना चाह रहे हैं और लोगों को बांटने की कोशिश कर रहे हैं। युवाओं की बात सुनी जानी चाहिए।

राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी के अंदर युवाओं को यह बताने की हिम्मत होनी चाहिए कि क्यों अर्थव्यवस्था की हालत बिगड़ रही है। उनमें छात्रों के सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं है।

बता दें कि सोमवार को कांग्रेस समेत देश के 20 विपक्षी दलों ने संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) को वापस लेने एवं राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि वो सभी मुख्यमंत्री राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया को निलंबित करें, जिन्होंने अपने राज्यों में एनआरसी लागू नहीं करने की घोषणा की थी।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा बुलाई गई विपक्षी दलों की बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया जिसमें अर्थव्यवस्था, रोजगार एवं किसानों की स्थिति तथा सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कार्रवाई तथा जेएनयू एवं कुछ अन्य विश्वविद्यालयों में छात्रों पर हमले को लेकर चिंता प्रकट की गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार, अर्थव्यवस्था की स्थिति में सुधार करने की बजाय सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। विपक्षी दलों ने कहा, ” सीएए, एनपीआर और एनआरसी एक पैकेज है, जो असंवैधानिक है तथा गरीब, दबे-कुचले लोग, अनुसूचित जाति-जनजाति और भाषायी एवं धार्मिक अल्पसंख्यक इसके मुख्य निशाने पर हैं।”

(भाषा इनपुट के साथ)

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