पंजाब में फार्मेसी ऑफिसर्स भर्ती परीक्षा में सामने आई कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक होने का आरोप लगाया है और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग की है। वहीं राज्य कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के दावों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।

कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इंटरव्यू की कुछ बड़ी बातें:

सवाल: कांग्रेस का आरोप है कि AAP सरकार के कार्यकाल में कई पेपर लीक हुए हैं। क्या आपके पास इसके सबूत हैं?
जवाब: सब कुछ रिकॉर्ड पर है। एफआईआर दर्ज हुई हैं। अगर मुख्यमंत्री भगवंत मान के दावे के मुताबिक कोई पेपर लीक नहीं हुआ तो फिर एफआईआर क्यों दर्ज की गईं? सभी अखबारों में इन मामलों की रिपोर्ट प्रकाशित हुई है।

सवाल: AAP का कहना है कि फार्मेसी परीक्षा में पेपर लीक नहीं हुआ बल्कि यह तकनीक के जरिए किया गया एक ‘सॉफिस्टिकेटेड चीटिंग रैकेट’ था।
जवाब: यह केवल सच छिपाने की कोशिश है। AAP शब्दों का खेल खेल रही है। सरकार खुद मान रही है कि तकनीक के जरिए बड़े स्तर पर नकल हुई जिसका मतलब है कि वह परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में विफल रही। कौन जानता है कि तकनीक के जरिए ऐसे कितने और मामले हुए होंगे। इसका असर उन हजारों अभ्यर्थियों पर पड़ा जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा दी।

उन्होंने कहा कि NEET मामले में भी 22 लाख छात्रों में से सभी को प्रश्नपत्र नहीं मिला था लेकिन उसका असर सभी छात्रों पर पड़ा। यही स्थिति पंजाब की फार्मेसी भर्ती परीक्षा में भी है।

सवाल: आपने शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस के इस्तीफे की मांग की है। क्यों?
जवाब: जैसे केंद्र में NEET पेपर लीक के बाद धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उचित थी, उसी तरह पंजाब में हरजोत सिंह बैंस को भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए। पहले इस्तीफा होना चाहिए, उसके बाद जांच। पहले मंत्री नैतिक आधार पर इस्तीफा देते थे। हमें AAP से ऐसी नैतिकता की उम्मीद नहीं है लेकिन जवाबदेही तय कराई जाएगी।

सवाल: मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि उनके साढ़े चार साल के कार्यकाल में कोई पेपर लीक नहीं हुआ और फार्मेसी परीक्षा में केवल नकल की कोशिश हुई थी जिसे तुरंत रोक दिया गया।
जवाब: मुख्यमंत्री खुलेआम झूठ बोल रहे हैं। समझ नहीं आता कि वह ऐसी बातों का बचाव क्यों कर रहे हैं। शायद दिल्ली में बैठे अपने नेताओं के दबाव में ऐसा कर रहे हैं।

सवाल: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस युवाओं और पहली बार वोट डालने वालों तक कैसे पहुंचेगी?
जवाब: कांग्रेस हमेशा युवाओं की पार्टी रही है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही मतदान की उम्र 21 से घटाकर 18 वर्ष की थी। कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) युवाओं से जुड़ा संगठन है। हाल के छात्र आंदोलनों में भी राहुल गांधी युवाओं के बीच सबसे लोकप्रिय नेता के रूप में सामने आए।

सवाल: पंजाब के युवा बेरोजगारी, नशे और परीक्षा संबंधी तनाव जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कांग्रेस इन मुद्दों का समाधान कैसे करेगी?
जवाब: केवल नारे और फोटो खिंचवाने से काम नहीं चलेगा। पंजाब में अपार संभावनाएं हैं। हमें संसाधनों का सही उपयोग करना होगा। समस्याओं का समाधान लंबी अवधि की व्यापक योजना से ही संभव है। साथ ही युवाओं का विदेश पलायन भी रोकना होगा।

सवाल: AAP खुद को युवाओं की पार्टी बताती है और सरकारी स्कूलों के NEET परिणामों को अपनी उपलब्धि बता रही है। कांग्रेस इससे कैसे अलग होगी?
जवाब: AAP उन योजनाओं का श्रेय ले रही है जिनकी नींव कांग्रेस सरकारों ने रखी थी। चार साल में कोई जादू नहीं हो सकता। यह लगातार कई वर्षों की मेहनत का परिणाम है। AAP भी भाजपा की तरह यह दिखाना चाहती है कि उससे पहले कुछ हुआ ही नहीं जबकि हकीकत इससे अलग है।

सवाल: कांग्रेस में गुटबाजी की चर्चा लगातार होती रही है। क्या इससे पार्टी को नुकसान होगा?
जवाब: हम इसे गुटबाजी नहीं मानते। कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है जहां हर नेता को अपनी बात रखने और नेतृत्व की जिम्मेदारी निभाने की आकांक्षा रखने का अधिकार है। हमारा लक्ष्य एक ही है- 2027 में पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाना। अलग-अलग नेताओं का अलग समय पर कार्यक्रमों में जाना कोई असामान्य बात नहीं है।

सवाल: क्या मुख्यमंत्री पद की दौड़ पार्टी को चुनावी नुकसान पहुंचा सकती है?
जवाब: स्वस्थ प्रतिस्पर्धा हमेशा अच्छी होती है क्योंकि इससे सभी नेता बेहतर प्रदर्शन करते हैं। कांग्रेस के नेता कभी चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ काम नहीं करते। हमारा साझा लक्ष्य AAP सरकार को सत्ता से हटाना है। यह सरकार सबसे भ्रष्ट और अक्षम सरकार है। मुख्यमंत्री अभी भी ऐसा व्यवहार कर रहे हैं जैसे वह कोई कॉमेडी शो चला रहे हों जबकि उन्हें राज्य चलाना चाहिए। यही सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है।