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कांग्रेस ने की केंद्र सरकार से मांग, विपक्षी नेताओं को कश्मीर जाने की मिले इजाजत

पार्टी ने प्रदेश में जारी पाबंदियों के मद्देनजर सूबे के दो-दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की नजरबंदी को भी तुरंत खत्म करने की मांग की है।

Author नई दिल्ली | August 14, 2019 5:15 AM
विपक्षी नेताओं को कश्मीर जाने की इजाजत मिले : कांग्रेस

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने और इसे दो हिस्सों में बांट केंद्र शासित प्रदेश बनाने के बाद की स्थितियों का आकलन करने के लिए विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को वहां जाने की इजाजत दी जानी चाहिए। पार्टी ने प्रदेश में जारी पाबंदियों के मद्देनजर सूबे के दो-दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की नजरबंदी को भी तुरंत खत्म करने की मांग की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक के राज्य की यात्रा पर आने संबंधी आमंत्रण को मंगलवार स्वीकार कर लिया लेकिन कहा कि उन्हें विमान की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि वह और विपक्ष के अन्य नेता जम्मू कश्मीर आएंगे। उन्होंने राज्यपाल से लोगों तथा सैनिकों से मुलाकात करने की छूट देने को कहा।

गांधी ने ट्वीट किया, ‘प्रिय राज्यपाल मलिक, विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल और मैं जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख की यात्रा के आपके गरिमामय न्योते को स्वीकार करते हैं। हमें विमान की जरूरत नहीं है लेकिन कृपा कर यह सुनिश्चित करें कि हमें वहां पर लोगों, मुख्यधारा के नेताओं और वहां तैनात हमारे जवानों तक जाने तथा उनसे मुलाकात करने की छूट हो।’

मलिक ने सोमवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को जम्मू-कश्मीर आने का न्योता देते हुए कहा था कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के लिए वह विमान भेजेंगे। राज्यपाल की टिप्पणी तब आई, जब गांधी ने कहा-राज्य में लोग मर रहे हैं और स्थिति सामान्य नहीं है जैसा कि सरकार दावा कर रही है। इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि केंद्र के फैसले के नौ दिन बीत चुके हैं।

सरकार किसी विपक्षी नेता को जम्मू- कश्मीर में घुसने की इजाजात नहीं दे रही। उन्हें हवाईअड्डे से ही वापस भेजा जा रहा है। यह स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने उपराज्यपाल मलिक द्वारा राहुल गांधी को आने के लिए विमान भेजे जाने का प्रस्ताव देने को लेकर कहा कि विपक्ष के नेताओं को सरकार के आवभगत की जरूरत कतई नहीं है लेकिन यह जरूर है कि विपक्षी नेताओं को जम्मू- कश्मीर के हालात का जायजा लेने और वहां के विभिन्न जन समूहों से बातचीत करने का मौका जरूर दिया जाना चाहिए।

शर्मा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के मामले में सरकार ने एकतरफा फैसला लिया। पाबंदी लगाने का फैसला भी मनमाने तरीके से लिया गया। लिहाजा, अब यह सरकार की ही जिम्मेदारी बनती है कि वह पहल करे और विपक्ष के नेताओं को वहां जाने की इजाजत दे। उन्होंने कहा कि विपक्ष को बिलकुल खुली छूट दी जानी चाहिए ताकि वे राज्य के लोगों से खुलकर बातचीत कर सकें। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने में नेशनल कान्फ्रेंस सरकार के साथ रही और जम्मू-कश्मीर में भाजपा ने पीडीपी के साथ मिलकर सरकार भी चलाई।

इससे जाहिर होता है कि भाजपा भी इन दलों व इनके नेताओं की अहमियत को समझती है। वह भी जानती है कि ये सभी भारतीय संविधान में आस्था रखने वाले लोग हैं। फिर इनको बीते 11 दिनों से नजरबंद रखने की भला क्या तुक है। उन्होंने कहा कि चाहे उमर अब्दुल्ला हों अथवा महबूबा मुफ्ती, उनकी नजरबंदी तुरंत खत्म की जानी चाहिए।

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