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कांग्रेस का आरोप, एम्पावर्ड ग्रुप ने चेताया फिर भी सरकार ने निर्यात कर दी ऑक्सीजन

सरकारी सूत्रों के मुताबिक "यह सरकार के खिलाफ एक दुर्भावनापूर्ण प्रोपगैंडा है। सरकार ने सिर्फ औद्योगिक ऑक्सीजन का निर्यात किया था। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उसकी यहां खपत कम थी। मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात नहीं किया गया था।"

Medical Oxygen, Exportसरकार का कहना है कि भारत से कुल ऑक्सीजन उत्पादन का 0.4% से कम मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात किया गया। (फोटो- एएऩआई)

देश में एक तरफ ऑक्सीजन की भारी कमी से कोरोनावायरस ग्रस्त लोग दम तोड़ रहे हैं, तो वहीं कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि सरकार कोविड-19 के दौरान मेडिकल ऑक्सीजन निर्यात करने में लगी रही। दूसरी तरफ सरकार ने इस बात का खंडन किया है कि साल 20220-21 में मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात किया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक “यह सरकार के खिलाफ एक दुर्भावनापूर्ण प्रोपगैंडा है। सरकार ने सिर्फ औद्योगिक ऑक्सीजन का निर्यात किया था। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उसकी यहां खपत कम थी। मेडिकल ऑक्सीजन का निर्यात नहीं किया गया था।”

कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट करके आरोप लगाया है कि “देश में मार्च 2020 में भारत सरकार के एम्पावर्ड ग्रूप ने ऑक्सिजन उपलब्ध कराने के बारे चेताया था, पर मोदी सरकार ने अप्रैल 2020-जनवरी 2021 के बीच 9,294 मीट्रिक टन ऑक्सिजन विदेश निर्यात कर दिया।” सरकार ने इस आरोप का खंडन किया है और कहा है कि अप्रैल 2020 से फरवरी 2021 के दौरान भारत ने 9884 मीट्रिक टन औद्योगिक ऑक्सीजन का निर्यात किया था। इस दौरान केवल 12 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन निर्यात की गई थी, जो भारत के वार्षिक ऑक्सीजन उत्पादन की कुल क्षमता के 0.4 प्रतिशत से भी कम है। औद्योगिक ऑक्सीजन का ज्यादातर निर्यात दिसंबर और जनवरी महीने के बीच हुआ। इस दौरान मेडिकल ऑक्सीजन की खपत 2775 मीट्रिक टन प्रतिदिन से घटकर 1418 मीट्रिक टन प्रतिदिन पर आ गई थी।

उधर, कांग्रेस पार्टी की वरिष्ठ नेता और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने “हम पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं, लेकिन देश भर में इसकी आपूर्ति करने के लिए सरकार ने पर्याप्त बंदोबस्त नहीं किए। सरकार के पास पहली और दूसरी लहर के बीच यह सब कुछ करने का समय था लेकिन उसने कुछ नहीं किया।”

उन्होंने बताया कि भारत प्रतिदिन 7,500 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन करता है। कोरोना की पिछली लहर जब अपने शिखर पर थी तो देश भर के अस्पतालों में इसकी खपत प्रतिदिन पैदा होने वाले ऑक्सीजन की मात्रा से आधे से भी कम थी।

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