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महाराष्ट्र चुनाव में फंड की कमी से जूझ रहे कांग्रेस प्रत्याशी! बड़े नेताओं का नहीं मिल रहा साथ

गौरतलब है कि कांग्रेस के जो सीनियर नेता हैं वे सभी अपनी-अपनी सीट बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।

(प्रतीकात्मक तस्वीर, द इंडियन एक्सप्रेस)

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मुकम्मल होने में महज हफ्ते भर का समय बचा है। लेकिन, कांग्रेस के भीतर चुनाव लड़ने को लेकर उत्साह और ऊर्जा में भारी कमी देखी जा रही है। आलम यह है कि बीजेपी-शिवसेना के सामने कांग्रेस का कोई भी कद्दावर नेता जमीन पर दो-दो हाथ करता दिखाई नहीं दे रहा है। प्रचार से लेकर जनसभा को संबोधित करने तक में सीनिय लीडरों का अभाव दिखाई दे रहा है। इसका साफ उदाहरण पिछले दिनों मुंबई में हुई राहुल गांधी की रैली है। इस रैली से मुंबई कांग्रेस के दो बड़े नाम मिलिंद देवड़ा और संजय निरूपम गायब थे। मुंबई कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष देवड़ा राहुल के करीबी बताए जाते हैं, लेकिन उनकी रैली में गैर-मौजूदगी को लेकर काफी चर्चाएं रहीं। वहीं, देवड़ा और निरूपम के बीच की आपसी जंग किसी से छिपी नहीं है।

बीते दिनों निरूपम ने ट्वीट के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी के अज्ञात नेता को ‘निकम्मा’ करार देते हुए, राहुल गांधी की रैली में नहीं पहुंचने पर सवाल उठाए थे। उनके इस ट्वीट को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल रही। हालांकि, वर्तमान में संजय निरूपम किसी भी रैली या प्रचार में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। उन्होंने खुले तौर पर प्रेस-कॉन्फ्रेंस करके पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर हमला बोला था और कहा था कि उनके खिलाफ सोनिया गांधी को भड़काया जा रहा है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि राज्य में निरूपम और देवड़ा ही बड़े आयोजनों से नदारद हैं। पार्टी के कई बड़े चेहरे चुनाव में सक्रिय गतिविधि से दूरी बनाए हुए हैं।

वहीं, अगर मीडिया रिपोर्ट की बात करें तो कांग्रेस महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में फंड की कमी से भी जूझ रही है। इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के प्रत्याशी फंड नहीं मिलने से दुखी हैं और उन्हें राज्य इकाई ने बताया है कि उनके पास फंड बिल्कुल नहीं है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस अपने एक प्रत्याशी को चुनाव लड़ने के लिए 10 लाख रुपये के करीब फंड करती है। ET की रिपोर्ट के मुताबिक दो दिन पहले कांग्रेस के दो समूह जो प्रदेश के विभिन्न जिलों में नुक्कड़ नाटकों के जरिए प्रचार कर रहे हैं, उन्होंने पार्टी से गाड़ी किराए पर लेने के लिए पैसे मांगे थे। लेकिन, राज्य के नेताओं ने कहा कि पार्टी के पास कोई फंड नहीं है।

गौरतलब है कि कांग्रेस के जो सीनियर नेता हैं वे सभी अपनी-अपनी सीट बचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और पार्टी के कद्दावर नेता अशोक च्वाहण भी अपनी सीट भोकर तक सीमित होकर रह गए हैं। उन्हीं की तरह और भी तमाम नेता अपने-अपने सीटों पर फोकस होकर चुनाव लड़ रहे हैं।

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