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कांग्रेस ने महंगाई पर मोदी सरकार को घेरा, कहा- शाकाहारी होना पाप हो गया है

थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर, 2019 में बढ़कर 2.59 प्रतिशत पर पहुंच गई और खुदरा मुद्रास्फीति की दर के 7.35 फीसदी हो गई है। मुख्य रूप से प्याज और आलू के दाम बढ़ने से थोक मुद्रास्फीति बढ़ी है।

Author नई दिल्ली | Updated: January 14, 2020 12:54 PM
देश में खुदरा मुद्रास्फीति दर 7.59 फीसदी पहुंच गई है। (Photo: REUTERS)

कांग्रेस ने खुदरा मुद्रास्फीति की दर के 7.35 फीसदी तक पहुंच जाने को लेकर मंगलवार को नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि इस मामले पर प्रधानमंत्री जवाब दें तथा सर्वदलीय बैठक बुलाकर मंहगाई कम करने की रूपरेखा बताएं। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि ‘शासन नहीं विभाजन’ भाजपा का नया नारा बन गया है।  उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मोदी सरकार ने महंगाई और बेरोजगारी के रूप में देश को दो बड़े धोखे दिए हैं। खाने पीने की वस्तुएं महंगी हो गयी हैं । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते थे अबकी बार महंगाई पर वार, अब वह चुप बैठे हैं।’’

उन्होंने दावा किया, ‘‘महंगाई डायन की तरह बढ़ती जा रही है। सब्जी के दाम बेतहाशा बढ़ गए हैं कि वह लोगों की पहुंच से बाहर हो गयी है। अब तो ऐसा लगता है कि शाकाहारी होना पाप हो गया है। गरीब आदमी की जिंदगी बहुत मुश्किल हो गयी है। देश की गृहणियों के लिए और भी मुश्किल हो गयी है।’’ कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि पिछले एक साल में 50 लाख नौकरियां चली गयी है। सुरजेवाला ने आरोप लगाया, ‘‘डायन महंगाई ने आम आदमी का बजट बिगड़ दिया है। सिर्फ भाजपा की आय में 1450 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।” उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री शासन नहीं, अब विभाजन कर रहे हैं। भाजपा का नारा शासन नहीं, विभाजन है।’’

सुरजेवाला ने कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री तत्काल विपक्षी दलों की बैठक बुलायें और देश को विश्वास में लें। वह बताएं कि 30 दिन में महंगाई कम करने की रूपरेखा क्या है।’’ गौरतलब है कि खुदरा मुद्रास्फीति की दर दिसंबर, 2019 में जोरदार तेजी के साथ 7.35 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से कहीं अधिक है। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में तेजी की वजह से खुदरा मुद्रास्फीति में उछाल आया है।

बता दें कि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर, 2019 में बढ़कर 2.59 प्रतिशत पर पहुंच गई। मुख्य रूप से प्याज और आलू के दाम बढ़ने से थोक मुद्रास्फीति बढ़ी है। नवंबर में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति 0.58 प्रतिशत पर थी। दिसंबर, 2018 में यह 3.46 प्रतिशत के स्तर पर थी।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में खाद्य वस्तुओं के दाम 13.12 प्रतिशत बढ़े। एक महीने पहले यानी नवंबर में इनमें 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी। इसी तरह गैर खाद्य उत्पादों के दाम चार गुना होकर 7.72 प्रतिशत पर पहुंच गए। नवंबर में गैर खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 1.93 प्रतिशत थी।

आंकड़ों के अनुसार, खाद्य वस्तुओं में माह के दौरान सब्जियां सबसे अधिक 69.69 प्रतिशत महंगी हुईं। इसकी मुख्य वजह प्याज है जिसकी मुद्रास्फीति माह के दौरान 455.83 प्रतिशत बढ़ी। इस दौरान आलू के दाम 44.97 प्रतिशत चढ़ गए। इससे पहले सोमवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर में बढ़कर 7.35 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो इसका पांच साल का उच्चस्तर है।

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