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एक ही डंडे में कांग्रेस व माकपा का झंडा

कहते हैं जब सब कुछ दांव पर हो, तो जोखिम भी उठाने पड़ते हैं और समझदारी भी दिखानी पड़ती है। बंगाल में राजनीतिक रूप से संकट के दौर से गुजर रहे वाममोर्चा और कांग्रेस की जुगलबंदी का असर नतीजों पर कितना दम दिखाता है, यह तो बाद में तय होगा...

Author कोलकाता | April 1, 2016 3:53 AM

कहते हैं जब सब कुछ दांव पर हो, तो जोखिम भी उठाने पड़ते हैं और समझदारी भी दिखानी पड़ती है। बंगाल में राजनीतिक रूप से संकट के दौर से गुजर रहे वाममोर्चा और कांग्रेस की जुगलबंदी का असर नतीजों पर कितना दम दिखाता है, यह तो बाद में तय होगा, लेकिन सामंजस्य के मापदंड पर दोनों दलों को अव्वल माना जा सकता है। दिलों का मिलना न भी हुआ हो, लेकिन बाहरी तालमेल कुछ इस कदर दिखने लगा है कि दो पार्टियों के झंडे एक ही डंडे में दिख रहे हैं। ऐसे में कहीं-कहीं तो आत्मविश्वास इतना बढ़ने लगा है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के अंदर बेचैनी पैदा होना लाजिमी है। हालांकि यह विश्वास कहीं न कहीं अपनी पार्टी के जनाधार को लेकर आशंका भी पैदा करने लगा है।

कोलकाता से खड़गपुर के रास्ते पूर्व मेदिनीपुर पार करते हुए सड़क के दोनों ओर खेती की जमीन पर या फिर गांव की ओर जा रहे रास्तों के दोनों किनारों पर राजनीतिक दलों के झंडे लगे दिखेंगे। दूसरे राज्यों से अलग यहां कई स्थानों पर आसपास ही भाजपा, तृणमूल कांग्रेस, माकपा और कांग्रेस के झंडे दिखेंगे। पर रोचक तथ्य यह है कि कांग्रेस और माकपा के झंडे एक ही खंभे में साथ-साथ लहराते दिखेंगे। ऊपर माकपा का लाल झंडा और उसके ठीक नीचे कांग्रेस का पंजा छाप झंडा।

पांसकुड़ा विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस-वाममोर्चा के संयुक्त उम्मीदवार चितरंजन दास ठाकुर को तृणमूल कांग्रेस की ओर से वही फिरोजा बीबी चुनौती दे रही हैं, जिनके पति नंदीग्राम में हताहत हुए थे। हालांकि फिरोजा बीबी को बाहरी माना जा रहा है। खुद तृणमूल के कार्यकर्ताओं के अंदर इस बात को लेकर थोड़ी नाराजगी भी है, लेकिन मुसलिम बहुल इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सब कुछ सोच समझ कर ही उसे उतारा है। वैसे भी ममता नहीं चाहेंगी कि पूर्व मेदिनीपुर में कोई चूक हो, क्योंकि पिछले चुनाव में इस क्षेत्र की सभी 16 सीटों पर तृणमूल ने ही कब्जा किया था, लेकिन वाममोर्चा-कांग्रेस के गठजोड़ के बाद दो बार विधायक रह चुके चितरंजन का दावा इसलिए खारिज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि सामंजस्य जबरदस्त है।

पांसकुड़ा के माकपा व कांग्रेस के नेताओं को विश्वास है कि इस बार पूर्व मिदनापुर में उनका गठबंधन आधा दर्जन सीटें जीत सकता है। कारण पूछने पर नेतागण कहते हैं कि आपको हमारी एकता नहीं दिख रही है? हमारे नेता से लेकर कार्यकर्ता तक हर मोर्चे पर साथ खड़े हैं और हम पूरे राज्य में डट कर मुकाबला करेंगे। एक दिन पहले ही माकपा की ओर से सीटों के बंटवारे का काम देख रहे रोबिन देब ने दो-तीन सीटों से वाममोर्चा उम्मीदवार हटाने की घोषणा की थी ताकि कम के कम सीटों पर दोस्ताना लड़ाई की नौबत आए।

रोबिन ने यह भी संभावना जताई थी कि अलीपुरद्वार सीट जहां से आरएसपी अपना उम्मीदवार हटाने को लेकर अनिच्छुक है, वह सीट भी कांग्रेस के लिए छोड़ी जा सकती है। उन्होंने कहा था जिसका मजबूत उम्मीदवार होगा उसी को मैदान में रहना चाहिए। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी ने भी अपने कार्यकतार्ओं को वाममोर्चा उम्मीदवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने की अपील की थी। पूरे प्रदेश में इसका नजारा भी खूब दिख रहा है। यही कारण है कि तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में थोड़ी बेचैनी है।

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